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नेपाल में ‘लाल’ सामंतवाद..?

 
भव्य महल बना माओवादी प्रचंड का निवास

काठमांडू, बुधवार,

नेपाल के सबसे प्रभावशाली माओवादी नेता पुष्पकमल दहल प्रचंड काठमांडू में करोड़ों रूपए के एक भव्य महल को अपना निवास स्थान बनाने को लेकर आलोचनाओं से घिर गए हैं और वरिष्ठ पत्रकारों ने इसे ‘लाल सामंतवाद’ का उदाहरण करार दिया है।1500 वर्गमीटर में फैला प्रचंड का यह महल 19.60 करोड़ रूपए मूल्य का है और प्रधानमंत्री के बालूवाटर स्थित सरकारी आवास, राष्ट्रपति भवन तथा महाराजगंज स्थित पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र के महल से महज आधे किलोमीटर दूरी पर है। इस महल में पार्किंग के लिए बहुत बड़ी जगह है तथा एक टेबल टेनिस हॉल भी है।

जाने माने अखबार अन्नपूर्णा पोस्ट के कार्यकारी संपादक गुणराज लूटेल ने टिप्पणी की है कि यह कोई आश्चर्यजनक नहीं है कि प्रचंड राजधानी में ऐसे शानो-शौकत वाले महल में चले गए हैं क्योंकि उनकी पार्टी ने संघर्ष के दौरान और उसके बाद विभिन्न तरीकों से अकूत संपत्ति जमा कर ली है।

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उन्होंने प्रचंड के नए आवास को ‘लाल सामंतवाद’ का उदाहरण करार दिया। प्रचंड दुनिया के निर्धनतम देशों में एक के नागरिक हैं लेकिन दक्षिण एशिया के सर्वाधिक धनी नेताओं में एक हैं।

लूटेल राजशाही के खिलाफ लड़ाई छेड़ने वाले प्रचंड एक ऐसी पार्टी के अगुआ हैं, जो गरीबों और वंचितों के लिए काम करने का दावा करती है। उन्हें यह भी बताने की जरूरत नहीं है कि ऐसे विशाल भवन हासिल करने के लिए उनके आय का स्रोत क्या है क्योंकि माओवादी पार्टी में पारदर्शिता नहीं है।

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उन्होंने कहा कि प्रचंड के भव्य महल में जाने की खबर ऐसे समय में आई है, जब सरकार ने 140 श्रेणियों को गोपनीय सूचना में रखने का फैसला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि माओवादी पार्टी और उसकी अगुआई वाली सरकार गैर पारदर्शी ढंग से काम कर रही है।

हालांकि यूसीपीएन माओवादी के सचिव और शीर्ष कट्टर नेता सीपी गाजुरेल ने कांतिपुर टेलीविजन के साथ साक्षात्कार में माना कि पार्टी में कोई पारदर्शिता नहीं है, जिससे कार्यकर्ताओं के मन में संदेह पैदा हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि माओवादी पार्टी के अंदर भी धनी और गरीबों के बीच खाई बढ़ती जा रही है, जो कट्टरपंथियों और प्रचंड एवं प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई की अगुआई वाली सत्तासीन गुट के बीच गहराते मतभेद का संकेत है।

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साप्ताहिक अखबार ‘जनमंच’ के संपादक प्रह्लाद रिजाल ने कहा कि हालांकि यह आलीशान महल दूसरे व्यक्ति के नाम से खरीदा गया है लेकिन इसके वास्तविक मालिक प्रचंड हैं। गरीब और सर्वहारा वर्ग के लिए काम करने के नाम पर वर्ष 2008 में नौ महीने में सत्ता की कमान संभालने वाले प्रचंड पार्टी की विचारधारा के विपरीत शानो-शौकत एवं सामंती जीवन जी रहे हैं। (भाषा)

news taken from webduniya.com

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