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बेटी और पौधा —— दोनों का काम , जीवन दान : पूनम पंडित

 

पूनम पंडित,मेरठ, १० मई |

poonam pandit बेटी और पौधा , दोनों एक समान ही होते हैं। दोनों का एक जैसा ही काम – जीवन देना। जिस प्रकार पौधे को कहीं भी रोपित कर दीजिये , वहीँ अपना सर्वस्व न्यौछावर कर खुशियाँ बिखेरने लगता है। उसी प्रकार बेटी भी, बाबुल का आँगन हो या ससुराल की देहरी — जहाँ भी रहेंगी उसी उपवन को महकाती रहेंगी। पौधे को आप कहीं भी रोपित कर दीजिये , वहीँ अपनी जड़ें बनाने लगता है तथा बिना किसी भेदभाव के सभी को अपनी छाया , हवा , फल , फूल और जीवन दायिनी ऑक्सीज़न देकर निस्वार्थ भाव से अपना कर्म करता रहता है। असंख्य लोगों को जीवन देता है। उसी प्रकार बेटियाँ भी जहाँ भी जाती हैं , उसी घर को अपना लेती हैं। मायके में — बेटी , बहन , बुआ और मौसी जैसे रिश्तों में अपनी स्नेह वर्षा कर घर उपवन को सींचती हैं। तो ससुराल में — पत्नी , बहू , माँ , भाभी , चाची , ताई , मामी , नानी , देवरानी , जेठानी आदि अनेकों रिश्तों में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर हर रिश्ते को सिंचित करती हैं। हर रिश्ते को पूरी ईमानदारी से निभाने का प्रयास करती रहती हैं। अपने परिवार और अपनों के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर देती हैं। इसी प्रकार पेड़ भी दूसरों को जीवन देने के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देता है।
..बेटी और पेड़ दोनों का काम ही जीवन देना होता है। बिना किसी स्वार्थ के दोनों ही अपना कर्म करते रहते हैं। बदले में चाहते हैं तो बस थोड़ा सा प्यार – दुलार और देखभाल।
… क्या हम इन दोनों के लिए इतना भी नहीं कर सकते ?
आइये हम सब मिलकर बेटी और पेड़ दोनों को बचायें।
उनकी देखभाल कर उन्हें स्नेह जल से सिंचित कर फलने फूलने का अवसर प्रदान करें ……. 
…… पूनम पंडित ( ग्रीन केयर सोसाइटी ) —
मेरठ ( इंडिया )

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