Wed. Nov 4th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

दीवारों पर लाल रंग डाल कर इशान देश को बिखरने से बचाना चाहता है

 

श्वेता दीप्ति, काठमांडू,२५ मई |

‘आसमान में भी सुराख हो सकता है एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों’ लिखने वाले ने यूँ ही नहीं लिखा होगा । आज इशान वही पत्थर बनकर उभरा है जिसकी मूक चोट ने हलचल मचा दी है । किस–किस को रोकोगे, किस–किस को पकड़ोगे और किस–किस को देश निकाला करोगे ? कहते हैं युवा देश का भविष्य होते हैं । आज यही भविष्य सत्ता के सामने सवाल बनकर खड़ा है । इशान का विरोध प्रतीकात्मक है, जिसे दबाने की नहीं समझने की आवश्यकता है । आश्चर्य है कि अब तक बुद्धिजीवी वर्ग खामोश है ? लाल रंग जो खतरे का भी प्रतीक है, शुभ भी है और लहु का रंग भी लाल होता है (वैसे भी जनता के खून से तो सरकार विचलित नहीं हुई थी, फिर इस लाल रंग से यह बैचेनी क्यों), दीवारों पर लाल रंग डाल कर इशान शायद सत्ता को इस खतरे से आगाह करना चाहता है कि देश को बिखरने से बचाना चाहते हो तो दमन और जिद की राजनीति छोड़ो । अपने मधेश पदयात्रा के दौरान उसने जो देखा, मधेश के दर्द को जो महसूस किया शायद इस प्रतीक के माध्यम से वह सरकार तक अपनी सोच पहुँचाना चाहता है । क्योंकि जब सड़क पर एकत्रित भीड़ भी सरकार को गम्भीर नहीं कर रही तो एक अकेली कमजोर आवाज को कौन सुनता शायद इसलिए इशान ने यह राह चुनी । एक सच्चे देशभक्त की तरह उसकी निगाह सभी को समान देख रही है और इसके लिए वो विरोध जताना चाहता है उस सिस्टम के प्रति जहाँ सदियों से विभेद की राजनीति होती आ रही है ।

यह भी पढें   सरकार संविधान और कानून की अनदेखी कर सत्ता का दुरुपयोग कर रहा है : प्रदीप पौडेल

raktam-final

क्या इशान को पकड़कर कारागार में डालना उचित है ? न उसके पास हथियार है ना ही कोई संगठन फिर उसे क्यों कैद किया गया है ? क्या यही लोकतंत्र है ? यह लोकतंत्र है या दमन तंत्र जिसके साए में यहाँ का नागरिक जी रहा है ? आज फोटो खीचने के आरोप में पत्रकार झा को गिरफ्तार किया गया क्या यही अभिव्यक्ति स्वतंत्रता है ? सम्भव है कि इशान ने जो किया वो सही नहीं हो किन्तु उसे पकड़ कर कैद में रखना भी सही नहीं है । वो इसी देश का नागरिक है सरकार को चाहिए कि उससे पूछे कि उसकी मंशा क्या है ? उसे आश्वासन दे कि स्थिति को सुधारा जाएगा । वैसे यह जाहिर सी बात है कि इशान का विरोध किस बात पर है । अर्थात मधेश के लिए बोलने वालों का यही हश्र होना है शायद सत्ता यही सम्प्रेषित करना चाह रही है । एक पहाड़ी मूल का लड़का आज मधेश के पक्ष में प्रतीक के रूप में खड़ा हुआ है काश इसका साथ वो युवा भी दे जो मधेश के लिए हमेशा नकारात्मक ही सोचते हैं । सच की जुबान नहीं होती पर सच को साबित होने से भी रोका नहीं जा सकता हाँ वक्त जरुर लगता है । सत्ता को सोचना होगा कि कल तक मधेश के युवाओं में असंतोष व्याप्त था, विदेशी युवा को तो देश निकाला कर दिया पर आज इशान उस समुदाय का नेतृत्व कर रहा है जिसके दम पर आप टिके हुए हैं । आज एक आवाज उठी है कल और भी चेतनशील आवाज इसके साथ होगी । उन आवाजों के मर्म को समझना होगा । फिलहाल तो सभी को इशान और झा के समर्थन में आना होगा और उसे बरी कराने की कोशिश करनी होगी ।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

You may missed

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com