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क्या क्या करेगी हमारी सरकार देश का विकास या व्यक्तिगत विकास ? मालिनी मिश्र

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मालिनी मिश्र, काठमांडू, ६ जून |

नेपाल देश की वास्तविकता सबको पता है । वस्तुिस्थति क्या है ? यह भोग रही जनता से ज्यादा कौन जान सकता है । यहाँ हर एक मन में पीड़ा व निराशा ही है ।

एक तरफ हमारी आदरणीय सरकार ने सांसदों के लिए पुनः सेवा सुविधाओं की फेहरिस्त तैयार की है । गौरतलब है कि २५% पारिश्रमिक में बढोत्तरी के अतिरिक्त अन्य सुविधाएं भी हैं जैसे,घर का किराया, संचार सुविधा,यातायात भत्ता व बैठक खर्च आदि । देखा जाय तो ८५ से ९० हजार तंनख्वाह लेने वालों के भी व्यक्तिगत खर्चे सरकार ही उठा रही है । दूसरी तरफ अभी भी वे सभी सुविधाओं से वंचित हैं जिन्हें सुविधाओं की या कहें तो सहायता की आवश्यकता है ।

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सहायता करने के लिए हमारी सरकार से ज्यादा तो धुर्मुस सुन्तली ने तत्परता दिखाई है, प्राप्त जानकारी के अनुसार दोहा में कार्यरत रमेश कार्की नामक व्यक्ति नें सहयोग राशि के रूप में ५१००० रु. का योगदान धुर्मुस सुँतली फाउण्डेशन को दिया है वो भी ऋण लेकर एवं यह साबित किया कि इंसान धन से नहीं मन से बड़ा होता है ।

सरकार सांसदों का घर भाड़ा देने में तो सक्षम है पर उन तमाम लोगों के लिए कुछ भी नही कर पा रही जो अबतक भू–आच्छादन से पीड़ित हैं । प्रत्येक दिन अखबारों में अभी भी हेडलाइन के रूप में भूकम्प पीड़ितों की खबर आ रही है जबकि उस हादसे को गुजरे १ वर्ष से ज्यादा हो गया है ।

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शिक्षा के क्षेत्र में व उद्योग वाणिज्य के क्षेत्र में बजट का कितना प्रतिशत भाग आया वह सब जानते हैं । अब हमारे देश को कृषि प्रधान देश न कहकर आयात उन्मुख देश कहना ज्यादा उचित है । सरकार की उदासीनता के कारण नेपाल का निर्यात चिन्ताजनक स्थिती में है । भन्सार विभाग के रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक वर्ष २०७२–७३ में नेपाल में जितना आयात हुआ है उसका १०% ही निर्यात हुआ है । जहाँ निर्यात ८६.६४% है वहीं आयात ७८४.५४% है

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व्यापार घाटे की बढ़ती प्रवृत्ति, दयनीयता से पूर्ण आर्थिक नीति, निरन्तर बढ़ रहे युवाओं में पलायनता से, विदेशी सहयोग से एवं सरकार की चमत्कारिक बातों से हमारा देश विकास नही कर सकता है ।

अभी की स्थिती से न तो बौद्यिक वर्ग सन्तुष्ट है, व्यापारिक वर्ग भी असन्तुष्ट है न तो मध्य वर्ग ,निम्न वर्ग को पूछता कौन है? आम जनता को क्या मिल रहा है ?हाँ हमारे साँसदों को जरुर मिल रहा है जिनका वेतन ३६ से ९९ हो गया है । इसी को कहते हैं बिल्ली के भाग्य से छींका टूटना ।

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