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क्या है मधेस की समस्या ? प्रचण्ड का वक्तव्य और समाधान

 

मालिनी मिश्र, काठमाण्डू, २७ जुलाई ।

हिंदुस्तान टाइम्स के लिये प्रशांत झा को  प्रधानमंत्री बनने से पहले दिये अपनी पहली अन्तरवार्ता में पुष्प कमल दहल प्रचण्ड नें सभी समस्याआें पर व आने वाले समय में प्रधानमंत्री के रुप में अपनी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया है । जिसमें उन्होंने तराई व मधेस की समस्याओं को भी इंगित किया है । न केवल इंगित ही किया वरन् मन से व हृदय से उनकी समस्याओं के निषेध के बारे में उनकी योजना व समाधान के बारे में बताया है ।

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प्रचण्ड ने पहली बार मधेशी शिकायतों पर वार्तालाप की व बताया कि वह समुदायों की आकांक्षाओं को बनाये रखने व संघीय सीमांकन व संविधान में संशोधन के लिए परिणाम मूलक वार्ता करेंगे ।

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उनका कहना है कि तराई के मधेसी पार्टियों ने उनका साथ दिया है जो कि भारत के साथ भी हैं, मुझे ओली के विरुद्ध वोट दिया और अब विश्वास है कि नयी सरकार का भी पूरा समर्थन करेगें ।

। उन्होंने कहा कि वह जब मधेस गये थे तो उन्हें लग रहा था कि वह अपने घर में आये हैं व कहा कि उनके मुद्दों का नेतृत्व करेंगे व उनकी सभी समस्याओं को समझते हैं तथा उत्साही समुदायों के प्रति वह प्रेम व सद्भाव पहले ही वह बना चुके हैं व उनकी समस्या व मानसिकता को समझने में उन्हे कोई भी समस्या नहीं है ।

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यह भी कहा कि मृतकों की नुकसान भरपाई व जखमों पर मरहम देंगें, कैदियों को भी रिहा करवायेंगे । यदि कैबिनेट में नही हो पाया तो एकतरफा ही इन कामों को आगे बढायेंगें । प्रचण्ड के अनुसार उन्हें नागरिकता के मामले में संशोधन जो कि मधेसी महिलाओं के लिए है ,के प्रावधानों में पुनः संशोधन करने में कोई समस्या नहीं दिख रही है ।

प्रचण्ड का कहना है कि प्रधानमंत्री के रुप में मैं सभी समस्याओं को देखुंगा चाहे वो सीमांकन की ही हो सभी पार्टियों जैसे नेपाली कांग्रेस, यू.एमं एल. आदि सभी के सहयोग से बीच का रास्ता निकालेंगे ।

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इस तरह की सकारात्मकता पूर्ण बातों से सभी प्रसंन तो हैं मगर अब देखना है कि यह रात गयी बात गयी की नीति है या वास्तव में प्रचण्ड मधेस की समस्याओं को समझेंगे ।

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