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मोक्ष प्राप्ती का एक साधन गाई यात्रा

 
मालिनी मिश्र, काठमाण्डू, १९ अगस्त ।।
। मृतकों के प्रति श्रद्धांजलि के रुप में व उन्हें याद करने के लिए मनाये जाने वाले इस पर्व को विशेष रुप से नेवाड समुदाय के लोग मनाते हैं पर इसमें भागीदार समस्त काठमाण्डू होता है क्योंकि स्थान स्थान पर घूमने की प्रथा से सभी इलाकों में अच्छी खासी चहल पहल रहती है । ko
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सभी इलाकों में कुछ भिन्नता के साथ मनाया जाने वाले इस  पर्व में कई तरह के नाच किये जाते हैं ।  परम्परागत रुप से धिन्तांघिसी नाच का विशेष महत्व है पर लाखे नाच, बंदर नाच, हनुमान नांच आदि भी जोडियों में प्रस्तुत किया जाता है । इस समय राजनीतिक व समाजिक व्यंग भी किये जाते हैं । पूर्णिमा अर्थात् राखी के अगले दिन से ही प्रारम्भ इस यात्रा कों अगले ६ दिनों तक मनाया जाता है ।
 इसी सन्दर्भ में सभी काठमांडूवासियों कों हिमालिनी परिवार की तरफ से गाई यात्रा की शुभकनमना ।

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