Thu. Nov 5th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

पितरों की मुक्ति काशी के बिना अधूरी

 

shradhji_16_09_2016

ये वक्त है पूर्वजों का ऋण यानी कर्ज उतारने का। इसीलिए पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध पक्ष में तर्पण जरूर करना चाहिए। इस दौरान पूर्वजों की मृत्युतिथि पर ही तर्पण करें। इन दिनों यानी भाद्रपद महीने के कृष्णपक्ष के पंद्रह दिन पितृपक्ष में दान की महिमा को भी श्रेष्ठ बताया गया है।

कहते हैं त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने भी अपने पिता राजा दशरथ के मरने के बाद यहीं पिंडदान किया था। यहां सीताकुंड नाम से एक मंदिर भी है।

यह भी पढें   आज का पंचांग: आज दिनांक 2 नवम्बर 2026 सोमवार शुभसंवत् 2083

पितरों के मुक्ति काशी के बिना अधूरी है। काशी के प्राचीन पिशाच मोचन कुंड के नजदीक त्रिपिंडी श्राद्ध होता है। त्रिपिंडी श्राद्ध पितरों को प्रेत बाधा और अकाल मृत्यु से मरने के बाद होने वाली व्याधियों से मुक्ति दिलाता है। श्राद्ध की इस विधि और पिशाच मोचन तीर्थस्थली का वर्णन गरुण पुराण में भी मिलता है।

मध्यप्रदेश के जबलपुर के ग्वारीघाट में नर्मदा के तट पर लोग पितरों के लिए पिंडदान करते हैं, जो श्राद्ध के लिए तय 55 स्थानों में शामिल है। उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के सोरो में पिंडदान के लिए भारी भीड़ जुटती है।

यह भी पढें   आज का पंचांग:- आज दिनांक 1 नवंबर 2026 रविवार शुभसंवत् 2083

ऐसा माना जाता है कि सृष्टि की रचना करने वाले भगवान विष्णु के अवतार वारह ने यहीं अवतार लिया था। यहीं असुर हिरण्याक्ष का भगवान वराह ने वध किया था। इसके बाद भगवान ने एकादशी के दिन यहीं पर अपना पिंडदान किया था।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com