Sat. Jun 27th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

भारतीय विदेशमंत्री सुषमा स्वराज का PAK को करारा जवाब

 

न्यूयॉर्क. sushma-reaction-1-new12_1

पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ की यूएन में स्पीच के 5 दिन बाद सुषमा स्वराज ने सोमवार को उन्हें करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कश्मीर भारत का है और रहेगा। पाकिस्तान को ख्वाब देखना बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कश्मीर में ह्यूमन राइट्स वॉयलेशन होने के पाकिस्तान के आरोपों का भी कड़ा जवाब दिया। कहा- जिनके घर शीशे के हों, उन्हें दूसरों के घर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें आतंकवाद से मुकाबले के लिए रणनीति बनानी होगी। यदि कोई देश इस तरह की रणनीति में शामिल नहीं होना चाहे, तो हम उसे अलग-थलग कर देंगे। ऐसे देश बोते भी हैं तो आतंकवाद, बेचते भी हैं तो आतंकवाद, निर्यात भी करते हैं तो आतंकवाद।: ”बहादुर अली तो जिंदा सबूत है हमारे पास कि सीमा पार से आतंकवादी आया है। एक चीज बता दूं कि अगर पाकिस्तान ये समझता है कि वह इस तरह की हरकतें करके या भड़काऊ बयान देकर भारत का कोई हिस्सा हमसे छीन सकता है तो मैं पूरी दृढ़ता और स्पष्टता से कहना चाहती हूं कि आपका ये मंसूबा कभी कामयाब नहीं होगा। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और अभिन्न हिस्सा रहेगा, इसलिए ये ख्वाब देखना छोड़ दें।”

यह भी पढें   पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बढ़ता जनाक्रोश: दमन, नाकेबंदी और मानवीय संकट के बीच संघर्ष

 

इस बीच, नरेंद्र मोदी ने यूएन में सुषमा को ग्लोबल मुद्दों को असरदार ढंग से उठाने के लिए ट्वीट कर बधाई दी।

 

मोदी ने कहा था- आतंकियों का भाषण पढ़ने वालों से बात नहीं करेंगे

प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान पर सबसे तीखा हमला किया। उड़ी हमले के 7 दिन बाद मोदी ने पड़ोसी देश के हुक्मरानों को सीधे निशाने पर लिया। शनिवार को यहां बीजेपी की रैली में 32 मिनट की स्पीच में उन्होंने 9 बार पाकिस्तान का नाम लिया। मोदी ने तीन बड़े बयान दिए। पहला- आतंकियों के लिखे भाषण पढ़कर कश्मीर के गीत गाने वाले पाकिस्तान के हुक्मरानों से हमें बात नहीं करनी। दूसरा- आतंकी कान खोलकर सुन लें, हमारा देश उड़ी हमले के शहीदों की कुर्बानी कभी नहीं भूलेगा। तीसरा- हमसे हजार साल लड़ने की बात कहने वाले पाक के हुक्मरानों की चुनौती मैं स्वीकार करता हूं।

यह भी पढें   पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बढ़ता जनाक्रोश: दमन, नाकेबंदी और मानवीय संकट के बीच संघर्ष

 

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed