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देवी को ही निषेध है देवी दर्शन, जनकपुर की राजदेवी मन्दिर

 

विजेता चौधरी, जनकपुर, 10 अक्टूबर।
दशाहरा में जनकपुरधाम पावन हो उठता है । जनकपुर की सारी शक्तिपीठों, भगवती मंदिरों को रानी की तरह सजाया जाता है । ठीक उसी तरह जैसे जानकी नवमी अर्थात सीता जनमोत्सव में जनकपुर का रोगन चमकउठता है । पर वहीं जनकपुर की राजदेवी माता का दर्शन महिलाओं के लिए शदियों से वर्जित है ।
अन्य शक्तिपीठ तथा मठमन्दिरों में घटस्थापना से पुर्णिमातक पुरुष के तुलना में महिलाओं की लम्बी भीड लगी रहती है । पर राजदेवी मन्दिर में महिलाआेंं को दर्शन निषेध का परम्परा अभी तक कायम है । यद्यपि राजदेवी मंदिर में महिलाओं की भीड आश्चर्य जनक दिखाइ पडता है । दशहारे के अवधिभर महिलाओं के लिए मन्दिर के खिडकी मात्र खुला रहता है । उसी खिडकी पर पूजन करने के साथ वहीं से बस नजर भर झांक कर देवी का दर्शन दुसरी देवी कर पाती हैं । यद्यपि फिरभी आस्था का आधार बरकरार है । वरण बढता ही जारहा है ।

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आखिर क्यों महिलाएं मात्र को राजदेवी माता का दर्शन निषेध है ? इस प्रश्न के जवाव में जनकपुर में बहुत सारी किम्बदन्ती प्रचलित है ।
मानाजाता है त्रेतायुग में राजा जनक की कुलदेवी की रुप में पूजित राजदेवी के मन्दिर में वर्षो पहले पूजा करने मन्दिर के भितर के स्थान में प्रवेश की थीं उसके बाद उनकी कोइ खोजखबर नहीं लगी ।अर्थात वें बेपत्ता हो गईं । इस विश्वास के कारण भी मन्दिर में महिलाओं का प्रवेश निषेध होने की बात बताइ जाती है ।
राममन्दिर के महन्थ रामगिरी ने इस विषय में बताया मासिकधर्म होने के कारण भी महिलाओं को इस मन्दिर में आने पर रोक लगाया गया होगा । यद्यपि इस बात में कोइ लाँजिक नहीं है फिरभी एक अन्ध आस्था तथा डर की वजह से महिलाएँ स्वयम भी मन्दिर प्रवेश करने पर कतराती है ।
बहरहाल मानव अधिकारकर्मी लगायत के सरोकारवाला इस विषय में व्यापक वहस व विरोध करती आ रही है ।

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