हिन्दी को या तो त्रिवि से हटाऊँ या उसे मान्यता दिलाऊँ ?- विमलेन्द्र निधि
काठमान्डौ, कार्तिक २७ गते
उपप्रधानमंत्री तथा गृहमंत्री विमलन्द्र निधि ने कहा है कि हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा की मान्यता देनी होगी । तराई मधेश में बहुसंख्यक नागरिक हिन्दी भाषा का सम्पर्क भाषा के रुप में प्रयोग करते हैं, इतना ही नहीं मधेश के नेता भी संसद में और तराई में हिन्दी भाषा का प्रयोग करते हैं । इसलिए अगर हिन्दी को मान्यता दी जाती है तो इसमें कोई हर्ज नहीं होनी चाहिए ।
विदेश जो नेपाली नागरिक जाते हैं उनकी भाषा स्वतः हिन्दी हो जाती है । भारत में हमारे यहाँ के लोग जाकर हिन्दी सीखते हैं । हिन्दी को अगर राष्ट्रीय भाषा की मान्यता दी जाती है तो इससे हमारा साहित्य, संस्कृति, और इतिहास विश्व भर में प्रसिद्ध होगा । और नेपाल विश्व में अपनी पहचान मजबूत कर सकेगा ।
नेपाल स्वर्णचाँदी व्यवसायीमहासंघ के दूसरे महाधिवेशन में साधारणसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही । उन्होंने कहा कि जब भी हिन्दी को मान्यता देने की बात आती है तो यहाँ ऐसा लगता है कि सर पर आकाश गिर गया हो । सवाल यह है कि हिन्दी को मान्यता दी जाय या त्रिवि से हिन्दी को हटा दिया जाय ? हिन्दी को राष्ट्रीय भाषा बनाने से कुछ बिगडने वाला नहीं है बल्कि हमारी स्थिति और ही अच्छी होगी । कुछ दिनों पहले हिन्दी विभाग के प्रमुख की हिन्दी किताब के विमोचन के समय मैंने यह बात कही तो मेरी काफी आलोचना हुई । पर सच तो यही है कि हिन्दी तराई मधेश में सम्पर्क भाषा है । यही नहीं पहाडी मूल के नेता भी जब मधेश जाते हैं तो हिन्दी का प्रयोग करते हैं । भाषा आयोग के विषय में सहमति कर संविधान में हिन्दी को मान्यता देनी होगी ।


