वीरगंज शहर के मेनरोडवासी में हडकम्प मचा
मुरलीमनोहर तिवारी (सिपु), वीरगंज , १६ जनवरी |
मध्यमाञ्चल क्षेत्रीय सडक निर्देशनालय ने १५ दिन का सुचना जारी किया है, जिसमें त्रिभुवन राजपथ के वीरगंज भन्सार से हेटौंडा तक राजमार्ग के बीच भाग से दाया-ँबायाँ २५/२५ मिटर अतिक्रमित क्षेत्र खाली करने का सूचना कार्यान्वयन के लिए सडक का नापनक्सा का काम शुरू किया है । 
सडक विभाग के सर्भेयर सुनील महतो ने बताया कि हेटौंडा से वीरगंज तक के राजमार्ग चौड़ा करके गण्डक से वीरगंज भन्सार तक के सडक का नाप शुरू हो गया है। साथ ही गण्डक से हेटौंडा तक नाप सम्पन्न हो चूका है, अब वीरगंज शहर का नाप होगा।
पहले चरण में सडक के बीच भाग में चिह्न लगाकर २५/२५ मिटर दाया-ँबायाँ घर, मन्दिर, अस्पताल, दुकान, सरकारी कार्यालय, बैंक, पोल, पेड़ आदि का पहिचान कर सूचीकृत प्रतिवेदन दिया जाएगा, फिर अतिक्रमित स्थान खाली कराकर सडक चौड़ीकरण कार्य शुरू होगा।
हेटौंडा शहर भितर के राजमार्ग के अतिक्रमित क्षेत्र गिराने के बाद से ही वीरगंज शहर के मेनरोडवासी में हडकम्प मचा हुआ है, अभीे नापनक्सा शुरू होने के बाद और तनाव बढेगा। ग़ौरतलब है कि पिछले कई वर्षों से बीरगंज में अतिक्रमण हटाने का कार्य अंतिम समय में राजनितिक दबाव में टल जाता है। इसे रोकने में ब्यापक राजनितिक और आर्थिक खेलचाल होते आया है। इस बार हेटौंडा से अतिक्रमण हटने के बाद सिर्फ परवानीपुर तक ही अतिक्रमण हटाने का प्रयास शुरू हुआ, लेकिन एमाले के सांसद बिचारी यादव जिनका क्षेत्र परवानीपुर पड़ता है, ने शर्त रखा की परवानीपुर और बीरगंज एक साथ नही टुटा तो अकेले परवानीपुर को नही टूटने दिया जाएगा।
अतिक्रमण हटाने और नही हटाने के सम्बन्ध में मीडिया में चर्चा-बहस का दौर चल पड़ा है। मीडिया में कोई इसे ग़लत नही कहते हुए, बिभिन्न तर्क से एक-दूसरे पर दोषारोपण किया जा रहा है। बीरगंज के प्रभावशाली लोग जो इसके चपेट में आने वाले है, और उनके अरबो के सम्पति इसमें हटने वाले है, इसे रोकने और टालने के खेल में लगे है। सूत्रों के अनुसार ख़बर आई है कि ये लोग नापी नक्शा के समय बड़ा विवाद और दंगा कराना चाहते है, जिससे ये कार्य आगामी सरकार बनने तक टल जाए, इस कार्य के लिए स्थानीय प्रशासन से साथ-गांठ किया जा रहा है, जिससे दंगे के समय उनका मौन समर्थन मिल सके।

