वीरगंज महावाणिज्य दूतावास द्वारा भारत के ६८वें गणतंत्र दिवस पर कार्यक्रम
मुरलीमनोहर तिबारी (सिपु ), बीरगंज, २७ जनवरी | भारत के ६८वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर महावाणिज्य दूतावास, वीरगंज ने विभिन्न कार्यक्रम किया है । कार्यक्रम में वाणिज्यदूत बीसी प्रधान ने झंडातोलन कर भारतीय राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का सन्देश वाचन किया । भारत के महान पर्व के अवसर पर जानकी मेडिकल कलेज धनुषा और नेपाल रेडक्रस सोसाइटी पथलैया को एम्बुलेन्स और श्री झम्केश्वरी मावि, थाहा सञ्चार, मकवानपुर और जनकपुर नर्सिङ क्याम्पस को बस सहयोग स्वरूप हस्तान्तरण किया गया ।
उक्त कार्यक्रम में बिरगंज के बिभिन्न बिद्यालयो द्वारा तिरंगे के साथ सैनिक परिधान देशभक्तिपूर्ण नृत्य और संगीत पेश किया गया । कार्यक्रम को उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया, जिसमें पर्सा के जिलाधिकारी, सभी सुरक्षा निकाय के प्रमुख, विभिन्न सरकारी एवं गैरसरकारी निकाय के प्रमुख, राजनितिक व्यक्तित्व, संचारकर्मी, वीरगंज में उपस्थित भारतीय नागरिक और स्थानीय नागरिकों की बड़ी उपस्थिति रही । कार्यक्रम का सहजीकरण वाणिज्यदूत राजेश कुमार ने किया ।
कार्यक्रम में व्यक्त भारतीय राष्ट्रपति के सन्देश में सशस्त्र बल, अर्धसैनिक बल और आंतरिक सुरक्षा बल के सदस्यों को विशेष बधाई दी गई । शहीद सैनिक और सुरक्षाकर्मी को श्रद्धांजली अर्पित की गई । उक्त सन्देश में कहा गया कि २६ जनवरी, १९५० को भारतीय जनता ने सभी नागरिकों के लिए न्याय, स्वतंत्रता, समानता तथा लैंगिक और आर्थिक समता के लिए स्वयं को एक संविधान सौंपा और भाईचारे, व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता को प्रोत्साहित करने का वचन दिया । उस दिन भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र बना ।
कार्यक्रम में व्यक्त भारतीय राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का लिखित भाषण का सम्पादित अंश इस प्रकार है–
१९५१ में ३६ करोड़ की आबादी की तुलना में, भारत अब १.३ अरब आबादी वाला मजबूत राष्ट्र हैं । भारत के प्रति व्यक्ति आय में दस गुना वृद्धि हुई है, गरीबी अनुपात में दो तिहाई की गिरावट आई है, साक्षरता दर में चार गुना बढ़ोतरी हुई है । आज भारत विश्व की प्रमुख अर्थ व्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ रही हैं । भारत, वैज्ञानिक और तकनिकी जनशक्ति के दूसरे सबसे बड़े भंडार, तीसरी सबसे विशाल सेना, न्यूक्लीयर क्लब के छठे सदस्य, अंतरीक्ष की दौड़ में शामिल छठे सदस्य और दसवीं सबसे बड़ी औद्योगिक शक्ति हैं ।
भारत की अर्थव्यवस्था २०१६–१७ के पूर्वाद्ध में, ७.२ प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई , और काले धन को बेकार करते हुए और भ्रष्टाचार से लड़ते हुए, विमुद्रीकरण से आर्थिक गतिविधि में, कुछ समय के लिए मंदी आ सकती है, लेकिन लेन–देन के अधिक से अधिक नकदी रहित होने से अर्थव्यवस्था की पारदर्शिता बढ़ेगी ।
भारत सरकार की प्रमुख पहलों का निर्माण, समाज के कल्याण को बढ़ावा देने के लिए किया गया है । स्वच्छ भारत मिशन का लक्ष्य गांधी जी की १५०वीं जयंती के साथ ०२ अक्टूबर, २०१९ तक भारत को स्वच्छ बनाना है । ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बहाली के लिए मनरेगा जैसे कार्यक्रमों पर बढ़े व्यय से रोजगार में वृद्धि हो रही है । ११० करोड़ से अधिक लोगों तक अपनी वर्तमान पहुंच के साथ आधार लाभों के सीधे अंतरण, आर्थिक नुकसान रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने में मदद कर रहा है । डिजिटल भारत कार्यक्रम डिजिटल ढांचे के सर्वव्यापक प्रावधान और नकदी रहित आर्थिक लेन–देन साधनों के द्वारा एक ज्ञानपूर्ण अर्थव्यवस्था का निर्माण कर रहा है । स्टार्ट–अप इंडिया और अटल नवाचार मिशन जैसी पहलें नवाचार और नए युग की उद्यमिता को प्रोत्साहन दे रही हैं । कौशल भारत पहल के अंतर्गत, राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन २०२२ तक ३० करोड़ युवाओं को कौशलयुक्त बनाने के लिए कार्य कर रहा है ।
२०१४ के आम चुनाव में कुल ८३ करोड़ ४० लाख मतदाताओं में से ६६ प्रतिशत से अधिक ने मतदान किया, फिर भी इस बिशाल लोकतंत्र में त्रुटियों की पहचान की जानी चाहिए और उनमें सुधार लाना चाहिए । स्थायी आत्मसंतोष पर सवाल उठाने होंगे । विश्वास की नींव को मजबूत बनाना होगा । चुनावी सुधारों पर रचनात्मक परिचर्चा करने और स्वतंत्रता के बाद के उन शुरुआती दशकों की परंपरा की ओर लौटने का समय आ गया है, जब लोक सभा और राज्य विधान सभाओं के चुनाव एक साथ आयोजित किए जाते थे । राजनीतिक दलों के विचार–विमर्श से इस कार्य को आगे बढ़ाना चुनाव आयोग का दायित्व है ।
भारत को आतंकवाद की बुरी शक्तियों को दूर रखने के लिए और अधिक परिश्रम करना है । इन शक्तियों का दृढ़ और निर्णायक तरीके से मुकाबला करना होगा, साथ ही भारत को अपने उन सैनिकों और सुरक्षाकर्मियों की बेहतरी को सुनिश्चित करने के लिए और अधिक परिश्रम करना है, जो आंतरिक और बाह्य खतरों से हमारी रक्षा करते हैं ।
आजादी के सर्वोच्च स्तर के साथ कठोर अनुशासन और विनम्रता आती है । अनुशासन और विनम्रता के साथ आने वाली आजादी को अस्वीकार नहीं किया जा सकता । अनियंत्रित स्वच्छंदता असभ्यता की निशानी है, जो अपने और दूसरों के लिए समान रूप से हानिकारक है । गांधी जी का प्रत्येक आंख से हर एक आंसू पोंछने का मिशन अभी भी अधूरा है ।



