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थारू मधेसी हैँ, विशेष तथ्यों पर आधारित विशलेषण : रोशन झा

 

 रोशन झा, फरवरी, राजबिराज | आज मधेस के थारू सहित आदिवासी-जनजातियों को यह समझाया गया है कि तुम मधेसी नहीँ हो जब कि यह प्रमाणित तथ्य है कि मधेस एवं भीतरी मधेस मेँ सदियों से रहने वाली जाती थारू है । इस भूमि के बासिन्दा होने तथा इनकी संस्कृति, भेषभूषा रहन सहन भी मध्यदेश अर्थात् मधेस के रहन सहन, भेषभूषा और संस्कृति ही रहने के कारण ये सभी मधेसी है।

ये मधेसी आदिवासी-जनजाति है। इस सम्बन्ध मेँ थारू प्रसिद्ध कवियत्री एवं लेखिका शान्ति चौधरी ने अपनी पुस्तक ‘नेपालका शोषित तराईका मधेसी मूल महिलाको समस्या र समाधान’ मे कहा है कि मेँ थारू महिला हूँ जो कि नेपाल का आदिवासी समुदाय है, परन्तु मेरी पहचान मधेसी भी है। उन्होँने कहा है- ‘मेरे पुरखा, मेरे माता-पिता दोनोँ मधेसी मूल के होने के कारण मधेस मेरे जन्म के साथ जुडा परिचय और पहचान है, जिसे मैँ परिवर्तन नहीँ कर सकती।’ उन्होँने आगे यह भी कहा है कि जैसे हिमाल के शेर्पा तराई मे बसोवास करने से तराईवासी नहीँ हो सकते है उसी प्रकार मैँ मधेसी तराईवासी होने के कारण हिमाल या पहाड मेँ रहने के बावजूद भी मधेसी के रूप मेँ ही पहचानी जाऊँगी। यह संस्कार, परंपरा तथा संस्कृति मेरे जन्म जहाँ कहीँ होने के बावजूद भी वंशज के नाता से जुडा हुआ है।

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ऊपर यह प्रमाणित हो चुका है कि थारु सहित की आदिवासी जनजाति सदियोँ से मधेस एवं भीतरी मधेस के बासिन्दा होने के कारण ये मधेसी हैं। इस सम्बन्ध मेँ महेश चौधरी द्वारा लिखित “नेपालको तराई तथा यसका भूमिपुत्रहरू” नामक पुस्तक मेँ भी भीतरी मधेस की चर्चा कि गई है। जबकि नेपाल की सीमा मेँ भीतरी मधेश है तो मधेस भी होगा। इस क्षेत्र को भीतरी मधेस कहने का ऐतिहासिक और प्रमाणिक कारण यह है कि मध्यदेश अर्थात् मधेस का अर्थ सिर्फ नेपाल की समतल तराई भूमि कॉ समझा जाता है। यह हिमालय से दक्षिण का भूभाग भी है। अत: हिमालय से दक्षिण अर्थात महाभारत और चुरिया के बीच का भू-भाग होने की वजह से इसे आदिकाल से भीतरी मधेस कहा गया है और इस भू-भाग के बासिन्दा होने के कारण से भी मधेसी हैँ। इस पर कोई प्रश्न नहीँ उठाया जा सकता है। इतिहास को तोडमडोर कर कृतिम ढंग से प्रस्तुत करने से वास्तविकता, ऐतिहासिक-प्रमाणिक तथ्यों को झुठलाया नहीँ जा सकता।

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हम यह स्पष्ट करना चाहते हैँ कि मधेस एक भौगोलिक पहचान है। मधेस के जो भी मूल बासिन्दा हैँ, वे सामाजिक एवं सांस्कृतिक रूप मेँ मधेसी हैं। क्योंकि यह क्षेत्र प्राचीन मध्यदेश का ही हिस्सा है। थारू तराई के मूल वासिन्दा है। खास कर उनकी पैदाइसी जमीन भीतरी मधेस है। थारू की जीवन शैली मेँ महाभारत और मध्यदेश की जीवन शैली का मिश्रण पाया जाता है। भीतरी मधेस महाभारत एवं मध्यदेश का संगमस्थल भी है।

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