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महामहिम रंजीत जी एक कुशल डिप्लोमाटिस्ट हैं : गणेश मंडल

Ganesh Mandal
काठमांडू, २६ फरवरी | भारत से जो भी डिप्लोमाटिस्ट नेपाल आते हैं, वे बड़ी ही सूझबूझ वाले व्यक्ति होते हैं । महामहिम रंजीत राय जी भी एक कुशल प्रशासक और डिप्लोमाटिस्ट हैं । नेपाल आने से पूर्व वे भारतीय विदेश मंत्रालय में नेपाल डेस्क–प्रमुख थे । इस हिसाब भी वे यहां की वस्तुस्थिति से भली –भांति परिचित थे । इसलिए उन्हें यहां किसी प्रकार के कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ा ।
संविधान निर्माण के दौरान नेपाल और नेपाली जनता के प्रति भारतीय जनता आौर सरकार की चाहत को उन्होंने सदैव यहां के सत्तारुढ़ व प्रतिपक्षी के साथ–साथ सभी दलों के नेताआों को सकारात्मक ढंग से ध्यानाकर्षण करते रहे । मधेश आन्दोलन के दौरान डिप्लोमाटिस्ट की जो जिम्मेदारी होती है, जो दायरा होता है, उसी तरह उन्होंने अपनी भूमिका निभायी, ऐसा मुझे लगता है ।
जहां तक सवाल है भारतीय सहयोग का, तो मेरे ख्याल से भारत सदियों से नेपाल में सहयोग करता आ रहा है । खासकर मधेश में भारत का कम सहयोग रहा है । मधेश में यूरोपीयन यूनियन, यूएन आदि का ज्यादा सहयोग रहा है । यद्यपि मधेश में भारत द्वारा जो भी सहयोग हो रहा है, वे सभी यहां के कथित बड़े–बड़े नेताओं के जरिये संचालित होता है, फलतः मधेश के दलित, पिछड़ावर्ग, मुसलिम, अल्पसंख्यक, जनजाति आदि जाति, वर्ग, समुदाय वंचित रह जाते हैं, और हैं भी ।
वैसे भारत द्वारा प्राप्त सहयोग में करीब ८० प्रतिशत सहयोग हिमाल व पहाड़ी इलाकों में क्रियान्वित होता है । और मधेश में सिर्फ २० प्रतिशत मिलता है । इसलिए आनेवाले समय में मधेश में जो भी सहयोग भारत से प्राप्त होता है, वह नेता के जरिये न होकर स्थानीय संस्थाओं, प्रतिष्ठानों व अन्य संबंधित निकायों द्वारा क्रियान्वित किया जाए ।
(गणेश मंडल, मधेशी नागरिक समाज के संयोजक हैं ।)

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