Mon. Aug 10th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

हिन्दी भाषा सिर्फ भारत की ही नहीं वल्कि सभी मधेशी की भाषा है : ई.आर.पी.सिंह

 

रामेश्वर प्रसाद सिंह(रमेश

रामेश्वर प्रसाद सिंह(रमेश), दुर्गापुर-3, सिरहा(मधेश), १६ अप्रैल | हिन्दी भाषा सिर्फ भारत की एकलौटी नहीं बल्कि हिन्द महासागर (Indian Ocean) की क्षेत्र में चलने वाली, वोलने वाली एवं अत्यधिक रुप में समझने वाली भाषा हैं। अतः हिन्दी का इस्तेमाल से मधेशीयों को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। आखिर में हिन्दी भाषा मध्यदेशी (मधेशी) की ही भाषा है यहीं से इसका अविष्कार भी हुआ है |

हाल परतंत्र अवस्था में रहे प्राचीन कुरु, पंचाल, कोची, विदेह की उत्तरी भुभाग ही वर्तमान में परतंत्र मधेश हैं। इसलिए हिन्दी पर हमें गर्व करना चाहिए।
कोई भी व्यक्ति परतंत्र मधेश की पूर्वी सिमाना राजगढ़ से पश्चिमी सिमाना महेन्द्रनगर तक एक ही भाषा नही बोल सकता | इस क्षेत्र में हर जगह इसकी स्थानीय भाषाएँ हैं | लेकिन हिन्दी बोलते हुए वे हर जगह घुम सकते हैं और किसकी को कोई कठिनाई नही होती है हिंदी बोलने में | इसलिये हिन्दी ही ऐसी भाषा हैं जो समग्र मधेश की साझा भाषा है। भले मधेश अभी नेपाली उपनीवेश की तले दवा हो पर बहुत ऐसा गाँव हैं जहाँ के लोग नेपाली विल्कुल ही नहीं समझते। और वैसे भी नेपाली तो मधेशियों पर लादी गई भाषा है |
नेपाली साम्राज्य की शिक्षा प्रणाली मधेशीयों को इस कदर जकड़ लिया हैं कि वे अपनी ही पहचान पर लज्जा वोध महसुस करते हैं पर अब ऐसा नहीं होना चाहिए। मधेशीयों को बन्द सोच से बाहर निकल कर खुली सोच में जीना होगा तभी मधेश अधिक सम्पन्न हो पाएगा एवं मधेशीयों की आत्मसम्मान, पहचान और अस्तित्व की रक्षा होगी।

यह भी पढें   तीन प्रज्ञा प्रतिष्ठानों में नियुक्ति... प्रज्ञा प्रतिष्ठान में कुमार नगरकोटी

 

 

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com