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मैथिला कला की सदियों पुराना इतिहास हैं

 


हिमालिनी डेस्क
काठमांडू, २७ मई ।
मैथिली सँस्कृति संगोष्ठी मे मिथिला कला के सदियों पुराना इतिहास होने की जिक्र किया गया हैं । युनेस्को के निमित नेपाल राष्ट्रिय आयोग अन्र्तगत रहे संस्कृति समिति के सहयोग में लोकसंचारद्वारा संपन्न हुयें मैथिली संस्कृति संगोष्ठी कार्यक्रम में मैथिला चित्रकाला का इतिहास सदियों पुराना होने की तथ्य बताया था ।

मिथिला संस्कृति, कला और चित्रकला के जानकारों ने कहा कि अब मिथिला चित्रकला देश में हि नहीं बल्की विदेशों मे भी अपनी लोकप्रियता को कायम किया हैं । साथ हि मैथिली चित्रकला अब व्यवसायिकता के तर्फ आगे बढ चुके हैं ।

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संगोष्ठी कार्यक्रम मे मिथिला कला एक सम्वृद्ध कला होने की बातों को जिक्र करतें हुए पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालय के उपकुलपति रामअवतार राय ने बताया कि अव मैथिली चित्रकला अनलाइन से भी बिक्री किया जा सकता हैं । उन्होने आगे कहा कि मैथिली कलाकारों की संरक्षण की जरुरत हैं । साथ हि मैथिल कला और चित्रकला को आगे बढाने के लिए मिथिला कला संबन्धी प्रशिक्षण की आवश्यता हैं ।

इसी तरहा, कार्यक्रम के दौरान तीन कार्यपत्र प्रस्तुत किया गया था जिस मे मैथिली कला और संस्कृति के बारे मे जानकारी कराया गया था । नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के नाटक विभाग प्रमुख रमेश रञ्जन के अध्यक्षता में सम्पन्न हुयें कार्यक्रम में डा.रामदयाल राकेश, एस.सी.सुमन, वीरेन्द्र पाण्डे, कलाकार प्रियंका झा लगायत के सहभागिता था ।

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