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सिर्फ निर्वाचन को ही नहीं, बल्कि आयोग को भी पर्यवेक्षण करते हैं ः प्रदीप पोखरेल

प्रदीप पोखरेल
 

निर्वाचन पर्यवेक्षण समिति नेपाल (ईओसी) साल २०७० में स्थापित निर्वाचन से जुड़ी एक मुख्य सामाजिक संस्था है । यह संस्था साल २०७० में हुई दूसरी संविधान सभा निर्वाचन को पर्यवेक्षण कर चुकी है । यह संस्था दूसरी संविधान सभा के दौरान इटहरी, बुटबल, नेपालगंज, धनगढ़ी व कलैया में अपनी शाखा स्थापित कर ५५ जिलों में करीब ५०० पर्यवेक्षकों द्वारा पर्यवेक्षण भी कर चुकी है । साल २०७४ वैशाख ३१ को हुए पहले चरण के चुनाव के दौरान १८ जिलों में १३२ पर्यवेक्षकों के द्वारा पर्यवेक्षण कर चुकी है । इसी संस्था के संस्थापक अध्यक्ष हैं– प्रदीप पोखरेल । ध्यातव्य है कि प्रदीप पोखरेल सन् २००० से लेकर २००४ तक एमनेस्टी इंटरनेशनल के सभापति भी रह चुके हैं और फिलहाल हुडेप नामक संस्था के अध्यक्ष हैं । स्थानीय निकायों के चुनाव को मद्देनजर रखते हुए निर्वाचन पर्यवेक्षण समिति नेपाल (ईओसी) के अध्यक्ष प्रदीप पोखरेल से हिमालिनी के सह–सम्पादक विनोदकुमार विश्वकर्मा ने बातचीत की । पेश है, बातचीत का संपादित अंश –

प्रदीप पोखरेल
प्रदीप पोखरेल

० चुनाव को आप किस प्रकार मूल्यांकन करते हैं ?
– चुनाव एक प्रजातान्त्रिक प्रक्रिया है । प्रजातन्त्र को संस्थागत करने के लिए इसे मेरुदण्ड माना जाता है । मतदाता अपने अभिमत की अभिव्यक्ति चुनाव द्वारा ही करते हैं । इसीलिए प्रजातान्त्रिक अभ्यास में चुनाव का अधिक महत्व होता है । सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक रूपान्तरण करने में चुनाव की अहम भूमिका होती है । इसीलिए चाहे वह आवधिक निर्वाचन हो या नियमित निर्वाचन ही क्यों न हो, निर्वाचन निष्पक्ष एवं पारदर्शी होना चाहिए । यही प्रजातन्त्र की सार–तत्व है ।
० आप अपनी संस्था के जरिये निकाय चुनावों के पर्यवेक्षण भी किए है । पर्यवेक्षण की आवश्यकता क्यों महसूस हुई ?
– देखिए, विकसित देशों में चुनाव को पर्यवेक्षण करना आवश्यक नहीं माना जाता है । क्योंकि वहाँ चुनावी प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवार द्वारा किया गया हर क्रियाकलाप आचार संहिता के तहत किया जाता है । वहां सुरक्षा की गारंटी होती है । मतदाता भी अपने अधिकार समझकर मतदान में भाग लेते हैं । विकासोन्मुख देशों में खासकर जहाँ गरीबी है, नागरिक अशिक्षित हैं, स्वविवेक निर्णय नहीं कर सकते हैं, उन देशों में पर्यवेक्षण की आवश्यकता होती है । खासकर नेपाल में राजनीतिक दल, सरकार, सरकारी, गैरसरकारी संस्था तथा मतदाताओं के द्वारा होनेवाले अवांछनीय क्रियाकलापों की खबरदारी करने के लिए ही पर्यवेक्षण की आवश्यकता महसूस हुई है । इसके साथ–साथ चुनाव के जरिये योग्य एवं ईमानदारयक्ति कैसे चयन किया जाए, इसकी शिक्षा प्रदान करने के लिए भी निर्वाचन को पर्यवेक्षण किया जाता है । विगत में हुई संविधान सभा चुनाव को भी हम अपनी संस्था के जरिये पर्यवेक्षण किए थे । इसी प्रकार पहले चरण में संपन्न निकाय चुनावों का भी पर्यवेक्षण किए हैं और दूसरे चरण के पर्यवेक्षण हेतु तैयारी प्रक्रिया में हैं ।
० आपने मतदाता शिक्षा की चर्चा की । वास्तव में, क्या है मतदाता शिक्षा ?
– निर्वाचन को स्वच्छ, निष्पक्ष एवं परदर्शी बनाने के लिए मतदाता शिक्षा की आवश्यकता होती है । मतदान के दौरान अपने चहेते उम्मीदवार को सही तरीके से मतदान के द्वारा चयन करने के लिए जो शिक्षा मतदाता को दी जाती है, वही मतदाता शिक्षा कहलाती है । मतदान करने की प्रक्रिया, मतदान से कोई भी मतदाता वंचित न हो, उनका मत इनवॉलिड न हो आदि जैसी गतिविधियां मतदाता शिक्षा के अंतर्गत आती है ।

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० मतदाता शिक्षा किस संस्था द्वारा दी जाती है ?
– मतदाता शिक्षा निर्वाचन आयोग द्वारा दी जाती है । इसके अतिरिक्त चुनाव से जुड़ी गैर सरकारी संस्थाओं तथा मानवाधिकार से जुड़ी संस्थाओं के द्वारा भी यह शिक्षा दी जाती है । इसी प्रकार राजनीतिक दलों के द्वारा भी चुनाव के समय ‘डोर–टु–डोर’ मतदाता शिक्षा दी जाती है । संविधान सभा के दौरान निर्वाचन पर्यवेक्षण समिति नेपाल द्वारा राजधानी लगायत देश के विभिन्न जिलों में मतदाता शिक्षा सम्बन्धित प्रशिक्षण संचालन किया गया था । उस समय डोनर एजेन्सी द्वारा आर्थिक सहयोग भी मिला था । लेकिन इस बार चुनाव सम्बन्धी सन्देहात्मक स्थिति व समय के अभाव की वजह से आर्थिक सहयोग नहीं जुटा पाए, फलतः हम मतदाता शिक्षा सम्बन्धी प्रशिक्षण सञ्चालन नहीं कर सकें । जबकि कुछ महीने पूर्व १० जिलों में नागरिक शिक्षा सम्बन्धित कार्यक्रम संपन्न कर चुके हैं ।
० मतदाता शिक्षा देने का उपयुक्त समय बताइए ?
– चुनाव से एक महीने पूर्व अगर यह शिक्षा दी जाती है, तो बेहतर होगा । हो सके तो वर्ष में दो से चार बार तक देने की आवश्यकता भी है । मतदाता शिक्षा देने के लिए अनेक नमूने और तरीके हैं । मतदाता शिक्षा को स्कूल व कॉलेज के पाठ्यक्रमों में ‘अतिरिक्त गतिविधियों’ के रूप में शामिल की जाए, तो ज्यादा कारगर सिद्ध होगा । इसके साथ–साथ निर्वाचन आयोग द्वारा स्वयम्सेवक परिचालित कर भी मतदाता शिक्षा दी जा सकती है । जैसे, नेपाल सरकार द्वारा समय–समय पर ट्रैफिक सम्बन्धी जानकारी हेतु ‘ट्रैफिक सप्ताह’ का आयोजन किया जाता है । लेकिन इसके लिए निर्वाचन आयोग की इच्छाशक्ति होनी चाहिए ।
० निकाय चुनावों के पर्यवेक्षण के दौरान क्या–क्या समस्याएं देखी गईं ?
– देखिए, पर्यवेक्षण के दौरान ढेर सारी समस्याएं देखी गईं । मतदाता शिक्षा प्रत्येक मतदाताओं को प्रदान करने की आवश्यकता थी, लेकिन निर्वाचन आयोग यह शिक्षा प्रदान करने में चूक गए । इसके अतिरिक्त विकलांग मतदाताओं के लिए विकलांग मैत्री मतदान केन्द्र कीयवस्था, वृद्ध, अशक्त, मरीज, प्रसूतिका मतदाताओं व वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष प्रकार की सुविधाएं नहीं थी । इन सुविधाओं की उपलब्धता में भी निर्वाचन आयोग चुक गए हैं । दूसरी तरफ राजनीतिक दल व उम्मीदवार भी अपने मतदाताओं को यह शिक्षा देने में चूक गए । यही मुख्य समस्याएं हैं । इसी प्रकार विदेश में रहनेवाले नेपाली मतदाता भी मतदान में शामिल होने के लिए आवाज उठा रहे हैं । जबकि इसके लिए अभी तक कोईयवस्था नहीं की गई है । हालांकि, संविधान सभा के दौरान समानुपातिक निर्वाचन के तहत ऐसीयवस्था थी । यह भी एक समस्या के रूप में मौजूद है ।
० क्या इन सारी समस्याओं को आप अपनी रिपोर्ट में समावेश करेंगे ?
– हां, पर्यवेक्षण के क्रम में जो–जो समस्याएं देखी गईं, इन सारी समस्याओं को हम अपनी रिपोर्ट में समावेश करेंगे । हम पर्यवेक्षण सिर्फ चुनावी प्रक्रिया को ही नहीं, बल्कि निर्वाचन आयोग को भी पर्यवेक्षण करते हैं । खासकर आयोग द्वारा जारी आचार संहिता व नियम, कानून को आयोग स्वयम् कार्यान्वयन कर रहा है या नहीं तथा मतदाता शिक्षा लगायत अन्य गतिविधियों को भी सूक्ष्मता से पर्यवेक्षण करते हैं । इस प्रकार पर्यवेक्षण के दौरान निर्वाचन आयोग, राजनीतिक दल, मतदाता एवं अन्य निकायों के द्वारा हुई कमी कमजोरियों को निर्वाचन आयोग, नेपाल सरकार, व अन्य सम्बन्धित निकायों को सिफारिश सहित अपनी रिपोर्ट सबमिट करते हैं ।
० निर्वाचन आयोग द्वारा प्रतिवेदन कार्यान्वित किया जाता है या नहीं ?
– प्रतिवेदन में ढेर सारे विषय वस्तुओं को समावेश किया जाता है । खासकर कानून द्वारा संशोधन, आचार संहिता में सुधार, सिफारिश, सुझाव व एकनॉलिज में रखने योग्य विषय वस्तुओं को समावेश किया जाता है । सुधार करने के सवाल में सिर्फ रिपोर्ट ही नहीं पेश करते हैं, बल्कि रिपोर्ट की प्रक्रिया को भी फ्लोअप करते हैं । आवश्यकता अनुसार कानूनी प्रक्रिया भी अवलम्बन करते हैं । यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट में भी रिट दर्ज करते हैं ।
० अन्त में आप हिमालिनी के जरिये कुछ कहना चाहेंगे ?
– सर्वप्रथम मैं हिमालिनी की पूरी टीम को साधुवाद देना चाहूंगा और हिमालिनी के जरिये समस्त मतदाताओं से यह आग्रह करना चाहूंगा कि दूसरे चरण के निर्वाचन को स्वच्छ, निष्पक्ष व पारदर्शी बनाने के लिए एकजुट होकर आगे बढ़े । इसके साथ–साथ योग्य, सक्षम व ईमानदार उम्मीदवार चयन करने के लिए मतदाता शिक्षा मेंयापक विमर्श हेतु पहल करे, जिससे अधिक से अधिक मतदाता शिक्षित व लाभान्वित हो सके ।

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