Fri. Nov 15th, 2019

निर्मल बाबा एक रहस्य
करुणा झा

nirmal baba
nirmal baba

सुरर्खियाँ बटोर रहे निर्मल बाबा आज किसी परिचय के मोहताज नहीं है। हिन्दी भाषी राज्यों मे यह नाम एक घरेलु नाम की तरह लोगों के दिलो दिमाग में जुडÞ गया है। देश-विदेश में देखे जाने बाले प्रमुख चैनलों के माध्यम से अपने लाखों भक्तों की समस्याओं को चुटकियों मे सुलझाने का दावा करनेबाले निर्मल बाबा उर्फनिर्मल जीत सिंह नरुल्ला को लेकर सोशल र्साईटस और इंटरनेटपर खुब टिप्पणियाँ की जा रही हैंर्।र् इटरनेट पर एक खास वर्ग लगातार निर्मल बाबा को कठघरे में खडÞा कर सवाल दर सवाल कर रहा है। निर्मल बाबा के दावों पर कुछ लोग सवाल भी उठा रहे हैं, वही उनके लाखों र्समर्थकों में गुस्सा भी देखने को मिल रहा है। निर्मल बाबा उर्फनिर्मल जीत सिंह नरुला एक आध्यात्मिक गुरु हैं, जो दिल्ली के कैलाश काँलोनी मे ठेकेदारी का काम करते थे।
निर्मल बाबा के आधिकारिक वेवर्साईट के अनुसार बाबा के पास छठी इन्द्रिया ९कष्हतज कभलअभ० हैं। कहते हैं कि इस रहस्यमयी छठी इन्द्रियाँ के विकसित होन से मनुष्य को भविष्य में होनेवाली घटना के बारे में पहले से ही पता चल जाता है। वैसे छठी इन्द्रिय का वर्ण्र्ााभारत के प्राचीन शास्त्रों में भी मिलता है। योग शास्त्र सहित अन्य शास्त्रों में वणिर्त इस विद्या को ध्यान, तप और प्राणायाम के बल से प्राप्त किया जा सकता है। छठी इन्द्रिय का कुंडलिनी से गहरा तालुक होता है। कुडलिनी जागृत करने के पश्चात मनुष्य त्रिकालदर्शी बन जाता है। लेकिन कुडलिनी जागृत करना इतना आसान नही, आजकल निर्मल बाबा विवादों में घिरे हैं, सबको कृपा देनेबाले के उपर आज कोई भी कृपा काम नहीं कर रही है। कहीं उनके ही भक्तों द्वारा  उनका पोल खोला जा रहा है तो कहीं उनके भक्त द्वारा गुस्सा भी फुट रहा है। निर्मल बाबा के एक समागम में शामिल होने के लिए प्रति व्यक्ति दो हजार रुपैया का पंजीकरण करवाना होता है। दो साल से उपर हर व्यक्ति को समागम के लिए पंजीकृत करवाना अनिवार्य है।
इस समागम में प्रवेश के लिए दो हजार रुपैयाँ का पंजीकृत स्लीप और एक पहचान पत्र की जरुरत होती है विना इन कागजातों के किसी का भी प्रवेश निषेध है। बाबा के समागमों की माँग का अन्दाजा, इसी बात से लगाया जा सकता है कि नई दिल्ली मे २६ अगस्त २०१२ तक बुकिंग बंद है। टी.वी. और इन्टरनेट के जरिये निर्मल बाबा पूरे भारत ही नहीं बल्कि दूसरे देशों में भी रोज लोगो तक पहुँचते हैं। निर्मल बाबा के समागम का प्रसारण देश विदेश के तकरीबन ३९ टी.वी. चैनलों पर सुबह से शाम तक रोजाना २५ घंटे अलग अलग समय पर किया जा रहा है। आज निर्मल बाबा पूरी तरह विवादों में घिर चुके हैं।
कुछ भक्तों का कहना है कि हमने कितने रुपैया खर्च कर दिये पर हमपर कृपा नहीं दर्ुइ। बिहार के अररिया जिले के एक व्यक्ति ने निर्मल बाबा पर धोखाधारी का मामला भी दर्ज करवाया है, और इलाहाबाद में पंडितों और महात्माओं के एक संगठन ने निर्मल बाबा को इसबार के कुंभ में आना भी निषेध कर दिया तथा भारत के लगभग सभी तर्ीथस्थलों में भी प्रवेश पर रोक लगा दी है। इधर एक निधि नाम की लडकी है जो टीवी सिरियलों में छोटी मोटी भूमिका करती है, उन्होने खुलासा किया है कि निर्मल बाबा उन्हे १० हजार रुपये देता था, शुरु के दो महीने तक निर्मल बाबा अपने ही आदमियों और जुनियर आर्टिस्टों से प्रश्न पुछवाता था। और भी बहुत सारे भक्तों ने बताया है कि निर्मल बाबा का कृपा में कोई तर्क संगत बात नहीं होती है, किसी को काला पर्स रखों, किसी को काले कुत्ता को रोटी खिलाओ ऐसा बेतुका उपाय बताते हैं।
एक लडकी ने पूछा- बाबा मेरे मोवाईल में बैलेन्स नहीं टिकता तो बाबा बोले बाय प|mेन्ड रखो बैलेन्स कभी कम नहीं होगा। खैर …. बाबा की कृपा करने का तरीका तो भक्तो ने नापसंद कर ही दिया, जो टीवी मे जयजयकार करते हैं, वे उनके अपने ही लोग होते है जिन्होंने बाबा को साइ का अवतार भी बताया। कई जगह निर्मल बाबा पर धोखाघडी का मामला दर्ज हो चुका है। अब देखना ये है इससे बचने के लिए निर्मल बाबा कौन से कुत्ते को रोटी खिलाते हैं या किस रंग का पर्स रखते हैं, या फिर हिरासत में जाते हैं।
निर्मल बाबा अपने एकाउन्ट्स में पैसा मंगवाते है, जो देता है ये उसी पर कृपा करते हैं जो नहीं देता उनपर नहीं। अब देखना है निर्मल बाबा किस एकाउन्टस में पैसा जमा कर खुद पर कृपा करवाते हैं, जो भी हो …मैं तो सिर्फगीता पर ही विश्वास करती हूँ, कर्म करो, फल मिलेगा। जैसा करोगे वैसा मिलेगा। अब देखना है कि निर्मल बाबा को कौन सा फल मिलता है।
निर्मल बाबा हाईटेक एवं मीडिया प्रबंधन के माध्यम से थर्ड आई आँफ निर्मल बाब के समागम का खेल और ज्यादा आगे चलता विज्ञापन को ले रायता फैला दिया और फिर शुरु हुआ निर्मल बाबा के कारनामों का पोस्टमार्टम। अन्य लोगों की तरह कुछ मीडिया हाउस को भी बाबा का २३५ करोडÞ का र्टन ओवर खटकने लगा। यहाँ देखा जाए तो मीडिया को पहले भी फयदा पहुँचा था। उनकी टी.आर.पी. में आई उछाल के कारण वही निर्मल बाबा की छीछालेदार करने में भी इलेक्ट्रानिक मीडिया पर भी प्रश्न चिन्ह लगा – यहाँ इलेक्टि्रनिक मीडिया अपनी जवाबदेही से किसी भी तरह से बच नहीं सकता भले ही कोई व्यक्ति विज्ञापन बतौर कोई सामाग्री जनता को परोस रहा था, सही गलत के साथ यहाँ मीडिया का भी दायित्व था पहले परीक्षण कर केवल सही एवं सकारात्म्क सामग्री को ही दिखाया जाना चाहिए था – जो नहीं हुआ। अब वक्त आ गया है केन्द्र का सूचना प्रसारण मन्त्रालय अपनी कुंभकणीय नींद को तोडÞ अपनी जवाबदेही को निभाए। मन्त्रालय सफेद हाथी की तरह न रहे – चेनलों पर प्रसारित हो होने वाली सामग्री किसी कडÞे नियमों एवं फायदों के बाद ही प्रसारित हो यदि नियमों में कोई लूप होल है तो उन्हें भी बन्द करों। ±±±

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