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जन्मसिद्ध- सन्तान के नागरिकता के लिए फोरम नेता यादव ने सर्वोच्च अदालत में किया मुद्दा

 
वीरगन्ज सावन | संघीय समाजवादी फोरम नेपाल, पर्सा अध्यक्ष नेता प्रदीप यादव ने वीरगञ्ज महानगरपालिका कार्याालय, पर्सा जिल्ला प्रशासन कार्यालय, प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद के कार्यालय और ब्यवस्थापिका संसद के बिरुद्ध बुधवार सर्वोच्च अदालत में रिट दायर किया है। जन्म के आधार में नागरिकता लिए हुए ब्यक्ति के संतान को जिल्ला प्रशासन कार्यालय ने नागरिकता देने से इन्कार करने के बाद, नागरिकता के अभावम में मताधिकार, सम्पति का अधिकार और जीवन के अनेक आधार से वंचित के पक्षमा हमने सम्मानित न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, नेता यादव ने बताया।
बंशज नागरिक माँ और जन्मसिद्ध नागरिक पिता द्वारा जन्म लिए हुए और नागरिकता से बञ्चित एक किशोरी स्विटी चौरसिया उक्त रिट निवेदन का आवेदनकर्ता हैं । उत्प्रेषण और प्रमादेश आदेश जारी कराने के लिए उक्त निवेदन दिया गया है। सरकार, सरकारी निकाय या सेवाप्रदायक से सम्पादन हुआ कोई भी निर्णय उल्टाने या पालन नही होने के अवस्था मे कानून पालन कराने के लिए इस प्राकृति का रिट सर्वोच्च में दाखिल कराया जाता है। संबिधान और देश के अन्य कानून ने नागरिकता के दिए हुए अधिकार को सरकार स्वयं पालन नही किया, ऐसा निवेदक का दावी है। नेपाल के संबिधान के धारा १० ने नेपाल के को कोई भी नागरिक को नागरिकता से बञ्चित नही किया जा सकता ऐसा संबैधानिक ब्यवस्था है। इसी प्रकार नेपाल नागरिकता सम्बन्धी ऐन २०६३ के अनुसार बने हुए नेपाल नागरिकता नियमावली के दफा ३ में १६ बर्ष उमेर पहुचे हुए नागरिक माँ या पिता या नजदीक के नातेदार के नागरिकता, जन्मदर्ता या जन्म स्थान तथा समय सम्बन्धीत सिफारिस प्रमुख जिल्ला अधिकारी  के समक्ष पेश करने पर नागरिकता लेने का प्रवधान है।
अभी इस कानून का पालन न करके आम जनता को नागरिकता से बञ्चित कराने का काम हो रहा है, इसलिए अदालत जाना पड़ा नेता यादव ने ‘हिमालिनी’ को बताया । बुधवार नेता यादव समेत के उक्त रिट निवेदन को दर्ता करते हुए सर्वोच्च अदालत ने सावन २७ शुक्रवार सुनुवाई के लिए पेशी दिया है।
इसके पहले नेता यादव ने इसी बिषय में जिल्ला प्रशासन कार्यालय पर्सा द्वारा नेपाल सरकार के गृह मन्त्रालय में दिए हुए ज्ञापनपत्र का अल्टिमेटम के अवधी समाप्त होने के बाद इंसाफ के लिए सर्वोच्च अदालत पहुचे है। नेपाल के मधेश क्षेत्र में हजारों युवा-युवती माँ और पिता के नागरिकता होने के बाद भी ख़ुद नागरिकता से बञ्चित है। रिट निवेदक के तर्फ से सर्वोच्च अदालत के अधिवक्ता दिपेन्द्र झा मुद्दा के बहस-पैरवी में सहयोग कर रहे है।

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