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हमारे देवता एक हैं इसलिए हम कभी अलग हो नहीं सकते : मनजीवसिंह पुरी

 
हमारे देवता एक हैं इसलिए हम कभी अलग हो नहीं सकते

भारत अपने स्वतंत्रता के सत्तर वर्ष पूरे कर चुका है । नेपाल स्थित भारतीय दूतावास ने भी स्वतंत्रता के ७१वें वर्ष की शरुआत कई आयोजना के साथ किया । इसी अवसर पर नेपाल भारत मैत्री समाज ने अपने अध्यक्ष प्रेम लश्करी की अध्यक्षता में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया । जिसमें नेपाल के पर्व उपराष्ट्रपति के साथ ही कई राजनीतिक व्यक्तित्वों की उपस्थिति थी । अपने विचारों को रखते हुए भारतीय राजदूत महामहिम मनजीवसिंह पूरी ने नेपाल और भारत के बीच के सत्तर वर्षों की भी चर्चा की । आपने कहा कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भले ही हम नेपाल भारत के सत्तर वर्षो. की बात करें पर यह रिश्ता कितने वर्षों पुराना है यह किसी को भी पता नहीं है ।

नेपाल भारत का रिश्ता अटूट है । भारत हमेशा नेपाल के साथ है और नेपाल में विकास देखना चाहता है । नेपाल के सामाजिक, राजनीतिक, शैक्षिक विकास में भारत नेपाल के साथ हमेशा मिलकर चला है और आगे भी चलेगा । हमारी भागीदारी पहले भी थी और आगे भी मजबूती से रहेगी । हमारा रिश्ता धार्मिक संस्कार से जुड़ा हुआ है, हमारे देवता एक हैं इसलिए हम कभी अलग हो नहीं सकते क्योंकि धर्म की बुनियाद बहुत मजबूत होती है । उन्होंने कहा कि जिस तरह भारत में बेटी बचाओ, बेटी पढाओ और सबका साथ सबका विकास की नीति हमारे प्रधानमंत्री ने चलाया है ऐसी ही नीति की जरुरत यहाँ भी है । हमें मिलकर विकास की राह पर आगे बढना है । भारत के लिए यह सत्तर साल चुनौती के रहे । आज यही चुनौती यहाँ भी है जिसे मिलकर दूर करना है और इस चुनौती में भारत सदैव नेपाल के साथ है ।

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