Thu. Apr 9th, 2020

धर्म के लिफाफे में दहशत का धन्धा : रणधीर चाैधरी

रणधीर चाैधरी

२६ अगस्त


भारत के हरियाणा प्रदेश के पंचकुला में अदालत से एक निर्णय क्या आया, भारत के पाँच प्रदेश आतंकित हो गये । इक्कतीस लोगाें की जान चली गई । शहर का शहर जल कर राख हो गया । कितनी सरकारी सम्पत्ति जलायी गयी इसका अभी तक सही आँकड़ा नहीं है ।
जी हाँ यह घटना हुई है शान्ति के दूत कहलाने बाले बाबा गुरमित राम रहीम को जब २००२ में उनको एक बलात्कार के घटना में आरोपित किया गया था और २४ अगस्त को उनको पंचकुला अदालत में दोषी ठहराया गया । बाबा के रूप में ऐसे कारनामा करने में लगे रहीम के समर्थकों ने पंचकुला को ध्वस्त तो किया ही साथ साथ यह भी प्रमाणित कर दिया कि धर्म वास्तव में एक अफीम ही है ।
बड़ा सवाल यह है कि जब सब को पता था कि २५ अगस्त को रहीम के कारनामा के उपर फैसला आने वाला है तो क्या हरियाणा के प्रदेश को पहले से तैयारी नहीं करनी चाहिए थी ? गौरतलब है कि हरियाणा प्रदेश ‘यूनियन टेरिटरी’ है । यानि के केन्द्र के छत्रछाया में चलने बाली प्रदेश । तो फिर अगर कोई केन्द्र सरकार अर्थात एनडीए सरकार ने अपनी जिम्मेवारी निभायी की नही ?
भारत जैसे लोकतन्त्र का हिमायती कहलाने बाले देश में ऐसी घटना लोकतन्त्र पे काला धब्बा है । वर्तमान अवस्था में जिस तरह से हिन्दुवादी और धर्मनिरपेक्षता को मुद्दा बना के राजनिती की जा रही है वह बिल्कुल गलत है । कहा जाता है की २००२ में बलात्कार के आरोपित राम रहिम ही हरियाणा पे अघोषित शासन चलाते आ रहे थे । पिछले लोकसभा के चुनाव हो या फिर प्रदेश सभा की भारतीय जनता पार्टी और पार्टी के स्वघोषित ‘चाणक्य’ रहीम जैसे हैवान की शरण में जा भाजपा के पक्ष मे चुनावी माहोल बना देने के लिए गिडगिडाया था । उस के बाद से रहिम के गुण्डागर्दी की रफ्तार और बढ्ने लगी थी । बलात्कारी रहीम के पक्ष में साक्षी महराज जैसे गेरुवा वस्त्र धारी खुलेआम अनाप सनाप बोल रहे हैं । साक्षी महाराज का कहना कि सीबिआई अदालत को फैसला सुनाने से पहले रहीम के लाखों समर्थकों की उपस्थिति को नजरअन्दाज नही करना चाहिये था । क्या ये महज अहम नही है की केन्द्र मे हिन्दुवादियों की सरकार है और गेरुवा वस्त्र धारी लोग कुछ भी कर सकते हंै, कुछ भी बयान दे सकते है ।
कहा जाता है की जब धर्म की राजनिती के गोलचक्कर मे सियासत फँस जाती है तो कुछ भी हो सकता है । सियासी से ज्यादा धर्म का समानान्तर सियासत चलाने लगते है । आज भारत मे वही हो रहा है । नरेन्द्र मोदी सरकार के नेतृत्व मे भारत के लोकतन्त्र और बहुआयामिक पक्षो में तिब्रता आती दिख रही थी परन्तु रहीम और साक्षी महराज जैसे बाबाओं के कारण मोदी सरकार शायद कुछ भी नया नही कर पाएंगे ।
अतः सब से यही अनुरोध है की कृपया परमात्मा पे अगर विश्वास करते है तो सीधा परमात्मा से सम्पर्क बनाने में लगे । सच्चा कर्म करें । जनहितकारी कार्यो मे विश्वास रखे । परमात्मा के नाम पर दलाली और बलात्कारियो को माध्यम न बनाए । नही तो आशाराम बापु और राम रहिम जैसे गुरुओ के कारण आप को सर छुपाने के लिये छत भी नहीं मिलेगी ।
अन्त मे भगवान न करे कि धर्मों के नाम पर विश्व में कहीं और ऐसी घटना घटे । इसी लिए नेपाल और भारत जैसे देशो मे धर्म की राजनिती तत्काल बन्द होनी चाहिए । और सभी को एक मन्त्र पे विश्वास करनी चाहिए की ‘धर्म की राजनीति नही, राजनीति में धर्म पैदा करनी चाहिए’ ।

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