अाखिर काैन हैं राेहिंग्या मुसलमान क्याें अपने ही देश में बेगाने हाे गए राेहिंग्या
हालांकि रोहिंग्या कई पीढ़ियों से म्यामांर में बसे हुए हैं। लेकिन म्यांमार की बहुसंख्यक बौद्ध आबादी के साथ आज भी ये घुल मिल नहीं सके हैं। रखाईन प्रांत के एक गांव का नाम रोहिंग है, माना जाता है उसी के नाम पर यहां आकर बसे मुलसमानों को राहिंग्या कहा जाने लगा।
म्यांमार में हमेशा से इन्हें इनके मुल्क बांग्लादेश भेजे जाने की बात उठती रही है लेकिन बांग्लादेश भी इन्हें मान्यता देने को तैयार नहीं है। हालांकि वो इन्हें उदारता के साथ पनाह तो देता है, लेकिन एक शरणार्थी के रूप में ही।
बांग्लादेश में ही सबसे ज्यादा 1 लाख 40 हजार के करीब रोहिंग्या शरणार्थी रहते हैं। शरणार्थी जीवन जीने के कारण ही रोहिंग्या मुसलमानों का कोई विकास नहीं हो पाया, इनकी ज्यादातर आबादी आज भी खानाबदोश जिंदगी जीती है। न इन्हें शिक्षा के अच्छे अवसर मिल सके न रोजगार के।म्यामांर में पिछले कुछ दिनों से सेना और सुरक्षाबलों ने रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। इस कार्रवाई के पीछे एक घटना को माना जाता है जिसमें कुछ दिन पहले म्यांमार के मौंगडोव सीमा पर पुलिस स्टेशन में घुसकर 9 पुलिस अधिकारियों की हत्या कर दी गई थी।
उस समय कहा गया था कि कुछ रोहिंग्या विद्रोहियों ने पुलिस अधिकारियों को निशाना बना रखा है। इसके बाद भड़की पुलिस ने रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ अभियान छेड़ दिया, जिसमें विद्रोहियों की पहचान करके उन्हें जेल में डाला जा रहा है। जिसमें सेना भी उनकी मदद कर रही है। हालांकि आरोप लगाए जा रहे हैं कि अभियान के बहाने पुलिस और सुरक्षाबल बेगुनाह रोहिंग्याओं को भी निशाना बना रहे हैं। पिछले कुछ समय में ही 100 से ज्यादा रोहिंग्या मुसलमानों की हत्या कर दी गई।
सैनिकों पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप भी लग रहे हैं। उन पर प्रताड़ना और बलात्कार के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि इसमें उन्हें देश के बहुसंख्यक बौद्धों का भी समर्थन हासिल है। हालांकि रखाइन प्रांत में साल 2012 से ही सांप्रदायिक हिंसा का दौर चल रहा है, जिसमें हजारों लोग मारे जा चुके हैं जबकि दो लाख से ज्यादा देश छोड़ चुके हैं।


