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मुम्बई बलास्ट : क्या कुछ चूडियाें ने उकसाया था दाउद काे

 

८सितम्बर

मुंबई विस्फोट के मास्टरमाइंड अबू सलेम समेत अन्य दोषियों पर टाडा की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। 1993 मुंबई सीरियल विस्फोट में टाडा अदालत ने अबू सलेम समेत छह को दोषी माना। हालांकि, मुंबई विस्फोट के पीछे का कारण बाबरी मस्जिद ढहाए जाने को बताया गया। 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाए जाने के बाद मुंबई समेत पूरे देश में दंगे भड़क गए थे।

चूड़ी बनी थी दाऊद के गुस्से की वजह!
एस हुसैन जैदी की किताब ‘ब्लैक फ्राइडे’ के मुताबिक 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचे को ढहाए जाने के बाद खामोश बैठे दाऊद को कुछ महिलाओं ने डिब्बे में चूड़ियां रखकर भेजीं। ये वह चीज थी, जिस पर दाऊद भड़क गया और उसके बाद ही फिर उसने गैंग को मुंबई की बर्बादी का आदेश दिया। दरअसल, विवादित ढांचे के ढहाए जाने और मुंबई में छिटपुट दंगों के बाद दाऊद पर बदला लेने का दबाव डाला जा रहा था। उसके कई करीबी चाहते थे कि वह कुछ ऐसा करे, जिससे बदला लिया जा सके।

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दाऊद के इशारे से दहल गई थी आर्थिक राजधानी
दरअसल, 1993 मुंबई धमाके में 257 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 713 गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस तबाही में करीब 27 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति नष्ट हो गई थी। इसकी चीख देशभर में सुनी गई। मुंबई धमाके को पूरे सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया था। अंडरवर्ल्ड डान दाऊद इब्राहिम का इशारा मिलने के बाद सबसे पहले मुंबई में धमाकों के लिए लोगों को चुना गया। उन्हें दुबई के रास्ते पाकिस्तान भेजकर ट्रेनिंग दी गई। स्मगलिंग के अपने नेक्सस का इस्तेमाल करते हुए दाऊद ने अरब सागर के रास्ते विस्फोटक मुंबई पहुंचाए थे।

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दो घंटे तक होते रहे ब्लास्ट

इतना ही नहीं, मुंबई में उन सभी जगहों की पहचान और समय तय किए गए, जहां पर विस्फोट की वारदात को अंजाम दिया जाना था। ये धमाके करीब दो घंटे तक रह-रह कर होते रहे और पूरी मुंबई की जिन्दगी को थामकर रख दिया था। चारों तरफ अफरातफरी और दहशत का मौहाल बन गया। पहला धमाका डेढ़ बजे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के पास हुआ और अंतिम धमाका 3.40 बजे (सी रॉक होटल) हुआ था।इन धमाकों में कुल 257 लोगों की मौत हुई और 713 लोग जख्मी हुए थे। गौरतलब है कि एस हुसैन जैदी की किताब ‘ब्लैक फ्राइडे’ पर बनी फिल्म का शिवसेना ने कड़ा विरोध किया था। इससे पहले साल 2007 में पूरी हुए सुनवाई के पहले चरण में टाडा अदालत ने इस मामले में याकूब मेमन सहित सौ आरोपियों को दोषी ठहराया था, जबकि 23 लोग बरी हुए थे।

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