आप भी जानिये भगवान शिव ने तीसरी आंख कहां खोली थी ?
शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव को त्रिदेव माना जाता है। भस्म, नाग, मृग चर्म, रुद्राक्ष आदि भगवान शिव की वेष- भूषा व आभूषण हैं। इन्हें संहार का देव भी माना गया है। आज आपको भगवान शिव की तीसरी आंख के बारे में बताने जा रहे है। क्या आप जानते है भगवान शिव ने तीसरी आंख कहां खोली थी ? और वह स्थान कहां पर स्थित है। यह तीर्थ स्थान यूपी में स्थित है। बलिया वाराणसी रेलमार्ग पर चितबड़ागांव एवं ताजपुर डेहमा रेलवे स्टेशनों के बीच में स्थित है कामेश्वर धाम। इस धाम के बारे में मान्यता है कि भगवान शिव ने देवताओं के सेनापति कामदेव को जला कर भस्म कर दिया था। यहां पर आज भी वह आधा जला हुआ, हरा भरा आम का वृक्ष है जिसके पीछे छिपकर कामदेव ने समाधी मे लीन भोले नाथ को समाधि से जगाने के लिए पुष्प बाण चलाया था।
कथा:- भगवान शिव कि पत्नी सती अपने पिता द्वारा आयोजित यज्ञ मे अपने पति भगवान शिव का अपमान सहन नही कर पाती है और यज्ञ वेदी मे कूदकर आत्मदाह कर लेती हैं। जब यह बात भगवान शिव को पता चलती है तो वो अपने तांडव से पूरी सृष्टि में हाहाकार मचा देते हैं। इससे व्याकुल सारे देवता भगवान शंकर को समझाने पहुंचते हैं। महादेव उनके समझाने से शान्त होकर, परम शान्ति के लिए समाधि मे लिन हो जाते हैं। इसी बीच महाबली राक्षस तारकासुर अपने तप से ब्रह्मा जी को प्रसन्न करके ऐसा वरदान प्राप्त कर लेता है, जिससे की उसकी मृत्यु केवल शिव पुत्र द्वारा ही हो सकती थी। सती के आत्मदाह के बाद भगवान शिव समाधि मे लीन हो चुके थे।
इसी वजह तारकासुर स्वर्ग पर अधिकार करने कि चेष्टा करने लगता है। यह बात जब देवताओं को पता चलती है तो वो सब चिंतित हो जाते हैं और भगवान शिव को समाधि से जगाने का निश्चय करते हैं। कामदेव भगवान शिव को समाधि से जगाने लिए खुद को आम के पेड़ के पत्तों के पीछे छुपाकर शिवजी पर पुष्प बाण चलाते हैं। पुष्प बाण सीधे भगवान शिव के हृदय में लगता है, और उनकी समाधि टूट जाती है। अपनी समाधि टूट जाने से भगवान शिव बहुत क्रोधित होते हैं और आम के पेड़ के पत्तों के पीछे खड़े कामदेव को अपने तीसरे नेत्र से जला कर भस्म कर देते हैं।
यह शिवालय रानी पोखरा के पूर्व तट पर विशाल आम के वृक्ष के नीचे स्थित है। इसमें स्थापित शिवलिंग खुदाई में मिला था जो कि ऊपर से थोड़ा सा खंडित है। इस शिवालय कि स्थापना अयोध्या के राजा कमलेश्वर ने कि थी। इस शिवालय के पास मे ही उन्होने विशाल तालाब बनवाया जिसे रानी पोखरा कहते है। यह एक चमत्कारिक शिवलिंग है। किवदंती है की जब 1728 में अवध के नवाब मुहम्मद शाह ने कामेश्वर धाम पर हमला किया था तब बालेश्वर नाथ शिवलिंग से निकले काले भौरो ने जवाबी हमला कर उन्हे भागने पर मजबूर कर दिया था। कहा जाता है कि यहां दर्शन-पूजन से मन के विकार और पाप ख़त्म हो जाते हैं।



