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कार्तिक पूर्णिमा का महत्तव

 
२ नवम्बर
कार्तिक पूर्णिमा या त्रिपुरी पूर्णिमा कहा जाता है। शिव के इस त्‍योहार से जुड़ी कई कथायें हैं। जाने कार्तिकेय का क्‍या है रिश्‍ता।

हर माह होती है पूर्णिमा

हिंदू धर्म में प्रत्येक वर्ष 12 पूर्णिमाएं होती हैं जो प्रतिमाह आती हैं। इसी में कार्तिक मास में आने वाली पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान की पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन को त्रिपुरी पूर्णिमा की इसलिए कहते है क्योंकि आज के दिन ही भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक असुर का अंत किया था और वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे। इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से भी पूरे वर्ष स्नान करने का फल मिलता है।

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कई हैं कथायें

सिख सम्प्रदाय में कार्तिक पूर्णिमा का दिन प्रकाशोत्सव के रूप में मनाया जाता है। क्योंकि इस दिन उनके संस्थापक गुरू नानक देव का जन्म हुआ था। इस दिन को गुरु पर्व भी कहा जाता है। इसी प्रकार कहते हैं कि कार्तिक पूर्णिमा को बैकुण्ठ धाम में देवी तुलसी का प्रकट हुई थीं और कार्तिक पूर्णिमा को ही देवी तुलसी ने पृथ्वी पर जन्म ग्रहण किया था। इसी दिन भगवान विष्णु ने प्रलय काल में वेदों की रक्षा के लिए तथा सृष्टि को बचाने के लिए मत्स्य अवतार धारण किया था।

क्‍या है कार्तिकेय और इस पूर्णिमा का संबंध

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इसी प्रकार शिव पार्वती के ज्‍येष्‍ठ पुत्र भगवान कार्तिकेय के संबंध में भी एक कथा है जो इस दिन उनकी पूजा के महत्‍व का वर्णन करती है। कहते हैं कि जब प्रथम पूज्‍य होने की प्रतियोगिता में उनके छोटे भाई श्री गणेश को विजयी घोषित कर दिया गया तो कार्तिकेय काफी नाराज हो गए और साधना करने बन चले गए। जब शिव और पार्वती उन्‍हें मनाने गए तो उन्‍होंने क्रोध में शाप दिया कि यदि कोई स्‍त्री उनके दर्शन करने आयेगी तो तो वो सात जन्‍म तक वैध्‍व्‍य भोगेगी और यदि किसी पुरुष ने ऐसा करने का प्रयास किया तो वो मृत्‍यु के बाद नरक जायेगा। बाद में किसी तरह महादेव और देवी ने उनका क्रोध शांत किया और उनसे कहा कि कोई एक दिन तो उनके दर्शन के लिए होना चाहिए, तब कार्तिकेय ने कहा कार्तिक पूर्णिमा पर उनका दर्शन महा फलदायी होगा। इसीलिए साल में एक ही बार वो अब दर्शन देते हैं। इसी वजह से उनका एक ही मंदिर है जो ग्‍वालियर में है। 400 साल पुराने कहे जाने वाले इस मंदिर के पट वर्ष में एक बार कार्तिक पूर्णिमा की रात को खोला जाता है और प्रातकाल स्‍नान पूजा के बाद एक साल के लिए बंद कर दिए जाते हैं।

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