चुनाव मे सामिल होना मधेशी जनता के लिऐ घातक कदम रहा : अब्दुल खानं
अब्दुल खानं, वर्दिया | नेपाल के संविधान काे संसाेधन के लिऐ विगत मे मधेशयाें ने महिनाे महिना अान्दाेलन किया, महिनेा सीमा अवराेध किया। पुलिस प्रशासन ने गाेलिया बरसाईं दर्जनाे वे-माैत मारे गऐ, सैकडाे घायल हुवे। हजाराे जेल जीवन विता रहे हैं परन्तु संविधान मे कुछ भी नही बदला गया। मधेश के तरफ से जाे नेतागण अगुवाई कर रहे थे वह लाेग अपनी भाषणाे मे कहते थे ” मधेश प्रदेश नही ताे मधेश दे लेगें।” विना संस्साेधन चुनाव कभी नही” लेकिन उन वाताे का मजाक बना कर शहिदाे का अपमान कर वे लाेग बढ़ चढ़ कर चुनाव मे सामिल हाे गऐ यह मधेशी जनता के लिऐ घातक कदम रहा।
अब मधेशयाें के लिऐ सिर्फ एक ही बिकल्प सामने है, वह है भाेट बदर क्याेंकि अनेक चुनाव चिन्ह मे माेहर मार कर भाेट खण्डित हाेगा, शहिदाे का अपमान हाेगा, नेपाल के काले संविधान काे स्विकारना हाेगा इस लिऐ तमाम चिन्हाे पर माेहर मार कर मधेशी ऐकता दिखा कर नेपाल के संविधान काे खारिज किया जा सक्ता है। मधेश काे खण्ड खण्ड हाेने से बचाने का यही उपाय हो सकता है। स्वतन्त्र मधेश गठबन्धन के अहवान पर जारी मत बदर अभियान का मधेशी जनता सम्मान कर सिधे मधेशी जनता काे विजय बनाने का अपिल गठबन्धन किया है। यह चुनाव ही वर्तमान संविधान का भविष्य निर्धारण कर सकता है। यह मधेसी जनता के हाथ मे है विना काेई छती के यह निर्णय भाेट बदर कर किया जा सकता है।


