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देउवा की नजर में क्या मधेशी जनता दास ही हैं ?

 

काठमांडू, २३ कार्तिक । अभी सामाजिक संजाल में प्रधानमन्त्री तथा नेपाली कांग्रेस के सभापति शेरबहादुर देउवा की एक भीडियो और अडियो भाइरल हो रहा है, जहाँ देउवा ने कहा है– ‘अब हम मधेशी को मालिक बनाने की अभियान में लग जाएंगे ।’ प्रधानमन्त्री देउवा ने जनकपुर पहुँच एक एक चुनावी सभा को संबोधन करते वक्त यह अभिव्यक्त दिया था । प्रधानमन्त्री देउवा की इसी कथन को लेकर अपनी–अपनी ओर से इसकी व्याख्या हो रही है । विरोध करनेवालों को कहना है कि अब तक देउवा मधेशी जनता को दास ही समझते थे, इसीलिए उन्होंने यह अभिव्यक्त सार्वजनिक किया है । लेकिन कुछ लोगों ने इसको स्वभाविक रुप में भी लिया है, तो कुछ लोग प्रधानमन्त्री का बचाव भी कर रहे हैं ।

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विरोध करनेवालों में से एक हैं– धनुषा निर्वाचन क्षेत्र नं. ४ से वामपन्थी गठबंधन की ओर से उम्मीदवारी देनेवाले एमाले नेता रघुबीर महासेठ । महासेठ जनकपुर के स्थायी निवासी भी हैं । उन्होंने कहा है कि देउवा की अभिव्यक्ति से तो यही लगता है कि वह अभी तक मधेशी जनता को दास ही समझते थे । उन्होंने कहा है– ‘आज तक एमाले को मधेश विरोधी पार्टी के रुप में गलत प्रचार किया गया । लेकिन गलत कौन है, देउवा की अभिव्यक्ति से पता चलता है । अब भी मधेश में कांग्रेस को ही विश्वास करते हैं तो नौकर बनना निश्चित है ।’

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इसीतरह राजपा के वरष्ठ उपाध्यक्ष वशेषचन्द्र लाल ने भी प्रधानमन्त्री की अभिव्यक्ति पर आपत्ति किया है । उन्होंने कहा है– ‘कांग्रेस ने जबर्जस्त संविधान निर्माण किया और अपने ही पार्टी के मधेशी सभासद को भी हस्ताक्षर कराया । मधेशियों के लिए तो यह गुलामों से करनेवाली जैसी व्यवहार है, इसीलिए देउवा से इस तरह का अभिव्यक्ति आना स्वाभाविक है ।’ जनकपुर के अधिकंश नागरिक समाज के अगुवा और पत्रकारों ने भी देउवा का कथन पर आपत्ति की है । उन सभी को कहना है कि देउवा ने आज तक मधेशी को गुलाम ही ठान लिया था, इसीलिए ऐसा अभिव्यक्ति आया है । इस तरह अपने अभिव्यक्ति सार्वजनिक करनेवाले हैं– जनकपुर नागरिक समाज के अगुवा तथा वरिष्ठ कलाकार रमेश रञ्जन झा, मधेश मीडिया संजाल के अध्यक्ष तथा पत्रकार अनन्त अनुराग, पत्रकार शैलेन्द्र क्रान्ति आदि ।

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