Sun. May 31st, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

प्रदाेष व्रत का महत्व

 

 

क्‍या है प्रदोष काल

हिन्दू धर्म की मान्‍यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत में शिव का पूजन किया जाता है। हर पखवाड़े में पड़ने वाली त्रयोदशी तिथि के सायं काल को प्रदोष काल कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि प्रदोष के समय महादेव कैलाश पर्वत के रजत भवन में नृत्य करते हैं और देवताओं को कृतार्थ करते हैं। यह भी मान्‍यता है कि प्रदोष व्रत को करने से हर प्रकार का दोष मिट जाता है। कई बार प्रदोष के नाम के अनुसार दिनों को पहचाना जाता है। जैसे सोमवार को सोम प्रदोष या चन्द्र प्रदोष, मंगलवार को भौम प्रदोष और शनिवार को शनि प्रदोष कहा जाता है।

यह भी पढें   श्री शिवमहापुराण कथा समापन पर भव्य महाप्रसाद, 1500 श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद

 

सप्ताह के सातों दिन होता है अलग महत्‍व

पंडितों के अनुसार प्रदोष जिस दिन पड़े उसके अनुसार ही व्रत करने वालों को फल की प्राप्‍ति होती है। जैसे रविवार के प्रदोष व्रत से अच्छी सेहत और लम्बी उम्र मिलती है, सोमवार के प्रदोष से सभी मनोकामनाऐं पूर्ण होती है। वहीं मंगलवार के प्रदोष व्रत से बीमारियों में फायदा होता है। बुधवार का प्रदोष व्रत रखने से सभी मनोकामनायें और इच्छायें पूर्ण होती हैं, वृहस्पतिवार को व्रत रखने से दुश्मनों का नाश होता है, शुक्रवार के प्रदोष व्रत से शादीशुदा जिंदगी और भाग्य अच्छा होता है, जबकि शनिवार को व्रत रखने से संतान लाभ होता है।

यह भी पढें   आज का पंचांग: आज दिनांक 29 मई 2026 शुक्रवार शुभसंवत् 2083

प्रदोष व्रत का महत्‍व

ऐसी मान्‍यता है कि वेदों को जानने वाले भगवान भक्त महर्षि सूत ने इस व्रत के महत्‍व को बताया था। उन्‍होंने कहा था कि कलियुग में जब मनुष्य धर्म के आचरण से हटकर अधर्म की राह पर जा रहा होगा और हर तरफ अन्याय और अनाचार का बोलबाला होगा, उस समय प्रदोष व्रत ही ऐसा व्रत होगा जो मानव को शिव की कृपा का पात्र बनाएगा। उन्‍होंने ये भी कहा कि मनुष्य के सभी प्रकार के कष्ट और पाप इस व्रत को करने से नष्ट हो जाएंगे। इसीलिए इस दिन भगवान शिव और पार्वती की पूजा की जाती है।

यह भी पढें   आज का पंचांग: आज दिनांक 27 मई 2026 बुधवार शुभसंवत् 2083

 

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *