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“चुनाव एक धोखा है, पूर्णबहिष्कार ही अब मौक़ा है : बिनोद पासवान

 

बिनोद पासवान | “चुनाव एक धोखा है,पूर्णबहिष्कार ही अब मौक़ा है” बिना संबिधान संशोधन के किया गया चुनाव मधेशी के साथ सरासर धोका है, और ऐसे हालत मे समर्पणवादी होकर सम्बिधान को लागू करानेवाली कोई भी चुनाव को किसी भी तरह का समर्थन करना या किसी भी पार्टी को भोट देना केवल मधेश को ही नहीं अपने आप को भी धोखा देने जैसा है । मधेसी शहीद और मधेश आन्दोलन का घोर अपमान है। हमने जितना संबिधान का नाटक देखना था देख लिया, अब और चालबाजी नहीं चलेगी। अब अन्तिम बिकल्प संबिधान की ख़ारेजी ही है, इसके लिए संबिधान लागू करानेवाली हर चुनाव का सशक्त बिरोध करें। चुनावकी बैधताको खारिज करें। इसके लिए उत्तम से उत्तम बिकल्प चुनाव का पूर्ण बहिस्कार करना याने मत को बदर करना ही सही बिकल्प है। केवल चुनाव बहिष्कार कहकर चुनाव मे न जाकर घर बैठे कौन जानेगा की आप क्या चीज का समर्थन या बिरोध कर रहे हैं। क्योंकि घर बैठनेवाले का तो कोई रिकार्ड कहीं रहता ही नहीं । लेकिन भैया-भाभी,चाचा-चाची ! मत बदरका तो बकायदा सरकारी हिसाब-किताब रहता है, मतबदर करनेका का मतलब आप नश्लवादी सत्ताको चुनौती दे रहे हैं की आप चुनावको नहीं मानते। चुनावको आप सदर नहीं बदर करनेका प्रयास कर रहे हैं। अगर आप मतबदर करते हैं, तो इसका सिधा मतलब आप चुनावकी बैधताको चुनौती दे रहे हैं, चुनाव खारेजिके लिए अंतरास्ट्रीय स्तरपर अपना आवाज पहुंचा रहे हैं। इसीलिए, बेहतर है की चुनावके समय आप घर से बाहर निकलिए, चुनावमे शामिल होकर हरेक मतपत्रमे कोठलीके अंदर या बाहर ७-८ बार अंधाधुन्द छाप लगाइए और बाक्सामे डाल दीजिए। अगर किसी भी बातपर आपका “ना’ है तो आपको मुहसे बोलना भी पडेगा और अस्वीकार करके दिखाना भी होगा। सिर्फ मौनी बाबा बनकर बैठे रहेंगे तो लोग वही समझेंगे ” मौन सम्मति लक्षणम” …. #मतबदर #पुर्णबहिस्कार

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