मुस्लिम महिलाअाें के लिए जीवनदान खत्म हुअा तीन तलाक
२८ दिसम्बर
नई दिल्ली, जेएनएन। तीन तलाक पर मोदी सरकार को बड़ी कामयाबी मिली है। लोकसभा में लंबी चर्चा के बाद तीन तलाक पर ऐतिहासिक ‘मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज’ बिल पास हो गया है। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विधेयक को पेश किया। बिल के खिलाफ सभी 19 संशोधन खारिज हो गए।
एमआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के भी 2 संशोधन थे। ओवैसी के पक्ष में दो और विरोध में 247 वोट पड़े। इसके साथ ही बीजू जनता दल के सांसद भ्रातृहरि महताब और कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव का संशोधन प्रस्ताव भी वोटिंग में खारिज हो गए। इसके बाद बिल के पक्ष में हुई वोटिंग में ये पास हो गया। लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने इसकी जानकारी देते हुए सदन की कार्यवाही शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी। कांग्रेस ने इसमें कुछ खामियों का उल्लेख करते हुए स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजने की मांग की जिसे सरकार ने ठुकरा दिया।

कानून मंत्री ने रखा सरकार का पक्ष
इससे पहले, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस बिल पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सभी इस्लामी मुल्कों में भी तीन तलाक नहीं है। वहां भी तलाक से पहले नोटिस देते हैं। इससे तलाक पीड़ितों को मदद मिलेगी न कि शरिया में दखल दिया जाएगा। कानून मंत्री ने आगे कहा, सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन तलाक पर रोक लगाने के बावजूद अभी भी यह जारी है। आज सुबह मैंने अखबार में रामपुर का एक मामला देखा जिसमें देर से जगने पर पत्नी को तलाक दे दिया।
सरकार ने ठुकराई कांग्रेस की मांग
कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड्गे ने कहा बिल में कुछ खामियां हैं जो कमेटी दूर कर सकती है हम इसके समर्थन में हैं। कांग्रेस की ओर से की गयी इस मांग को सरकार ने ठुकरा दिया और कहा कि जाे भी चर्चा हो सदन में ही होनी चाहिए। वहीं कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव ने कहा, ‘इस विधेयक में तिहरे तलाक को अपराध घोषित किया जा रहा है लेकिन मुआवजे को लेकर स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया है। 1986 के कानून में मुआवजा देने का स्पष्ट प्रावधान है। अधिकतर मुस्लिम देशों में तलाक देने वाले पति को नोटिस देकर सूचना देने का प्रावधान रखा गया है।‘
तीन तलाक को खत्म करने वाला कानून
इसका मसौदा गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले एक अंतर-मंत्री समूह ने तैयार किया है।
प्रस्तावित कानून एक बार में तीन तलाक या ‘तलाक ए बिद्दत’ पर लागू होगा। इसके तहत पीड़िता अपने व अपने नाबालिग बच्चों के लिए संरक्षण व गुजारा भत्ता की मांग कर सकती है।
इस मामले पर मजिस्ट्रेट अंतिम फैसला करेंगे। इसके तहत किसी भी तरह का तीन तलाक (बोलकर, लिखकर या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सएप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से) गैरकानूनी होगा।
तीन तलाक गैरकानूनी होगा और ऐसा करने पर पति को तीन साल की जेल की सजा हो सकती है।
दैनिक जागरण से


