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हमारी भूपरिवेष्ठित संवेदनशीलता भारत की ओर से संबोधित होना चाहिएः डा. महत

 
डा. प्रकाश शरण महत –नेता, नेपाली कांग्रेस

काठमांडू, २८ जनवरी । दुनियां में कम ही देश ऐसे होते हैं, जहां एक–दूसरे देश के नागरिकों को आवत–जावत के लिए पासपोर्ट की आवश्यकता नहीं पड़ती । भारत भी हमारे लिए एक ऐसा ही देश है, जहां जाने के लिए हम लोगों को पासपोर्ट आवश्यक नहीं है । सदियों से जारी सामाजिक, सांस्कृतिक, भाषिक संबंध के कारण ही ऐसा हो रहा है । सामाजिक–सांस्कृतिक संबंध को देखते हें तो लगता है कि दोनों देश एक ही है ।
लेकिन हमारे बीच राजनीतिक तथा कुटनीतिक संबंध भी है, जो दो अलग–अलग देश के रुप में परिभाषित करता है । दीर्घकालीन और मजबूत संबंध के लिए राजनीतिक और कुटनीतिक संबंध खुला होना जरुरी है । एक–दूसरे में जो भावना है, उसको समझने की जरुरत है । अर्थात् नेपाल और भारत दोनों के लिए एक–दूसरे से कुछ ऐसी अपेक्षाएं हैं, जिसको सम्बोधन होना चाहिए । हां, भारतीय संवेदनशीलता के लिए नेपाल को गम्भीर होना चाहिए और नेपाली जनभावना को भारत की ओर से सम्मान भी होना चाहिए । तब ही दो देशों के बीच आपसी संबंध मजबूत बन सकता है ।
भारत, अपनी सुरक्षा संवेदनशीलता के प्रति ज्यादा सतर्क दिखाई देता है, जो स्वाभाविक भी है । नेपाल इस को अनदेखा नहीं कर सकता । नेपाल की ओर से प्रतिबद्धता व्यक्त होना चाहिए कि किसी भी हांलात में नेपाल की भूमि भारत के विरुद्ध प्रयोग नहीं हो सकता ।
इसीतरह नेपाल एक भू–परिवेष्ठित देश है । भू–परिवेष्ठित संवेदनशीलता को भारत की ओर से सम्बोधन होना चाहिए । जिसके चलते नेपाल भी आर्थिक विकास और व्यापार में आगे बढ़ सके ।

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लेकिन कभी कभार राष्ट्रवाद के नाम में यहां सडक प्रदर्शन किया जाता है । राजनीतिक तथा कुटनीतिक संबंध द्वारा समस्या समाधान करने के बजाए इसतरह का हरकत करने से संबंध मजबूत नहीं हो सकता । हम चाहते हैं कि यहां के विकास के लिए भारत की ओर से आर्थिक स्रोत आ सके । क्योंकि नेपाल भी समृद्धि की ओर आगे बढ़ना चाहता है । लेकिन इसके लिए दोनों देश अपनी ओर से जीत का महसूस कर सके ।

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(भारत के ६९वें गणतन्त्र दिवस के अवसर पर नेपाल भारत मैत्री समाज द्वारा काठमांडू में आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त विचारों का संपादित अंश)

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