Sat. Apr 13th, 2024

हमारे प्राचीन वेद एवं पुराण जैसे ग्रन्थों में ç की महिमा या ओमकार के मन्त्र का बहुत बडा महत्व एवं शक्ति का उल्लेख किया गया है । आज सम्पर्ूण्ा विश्व में हुए अनुसंधानों से ओमकार के मंत्र का महत्व और भी अधिक लोकप्रिय होता जा रहा है ।
दुनियाँ के अनेक वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध कर दिखाया है कि ओम के उच्चारण मात्र से अनेक असाध्य रोगों की चिकित्सा संभव है । एक प्रसिद्ध विज्ञान पत्रिका ‘र्साईंस’ में प्रकाशित एक लेख में किये गये शोध की अगर माने तो ओमकार के लगातार जाप से चमत्कारिक प्रभाव देखने को मिलता है तथा अनेक असाध्य रोगों में भी इसके सकारात्मक प्रभाव देखने में आये हैं । ओमकार के लगातार जाप से चमत्कारिक प्रभाव देखने को मिलता है तथा अनेक असाध्य रोगों में भी इसके सकारात्मक प्रभाव देखने में आये हैं ।
ओमकार जितना धार्मिक दृष्टि से विशाल एवं गहरा है, उतना ही विज्ञान की दृष्टि में भी उपयोगी व कल्याणकारी है । अगर हम विज्ञान की माने तो ओम के उच्चारण से पेट, सीने और मस्तिक में पैदा हुये कम्पनों से शरीर की मृत कोशिकाओं को नयाँ जीवन मिलता है और नई कोशिकाओं का निर्माण होता है । ç के जाप से सम्पर्ूण्ा शरीर में संतुलित तरंगों का प्रवाह होने लगता है । ç के इस मंत्र द्वारा मनुष्य चमत्कारपर्ूण्ा लाभ ले सकता है । आज के बदलते इस भौतिक युग में मानसिक शान्ति एवं अनेक रोगों से मुक्ति के लिए यह मंत्र किसी अचूक औषधि से कम नहीं है ।
ç के मंत्र से मनुष्य को मानसिक शान्ति एवं शक्ति तो प्राप्त होती ही है परन्तु इसके साथ-साथ स्नायुओं की चंचलता दूर होकर विविध हृदय रोगों, उच्च रक्तचाप, मधुमेह जैसे रोगों से राहत मिलती हैं । ओमकार के नियमित जाप से हृदय की शुद्धि होती है, मानसिक शक्तियाँ प्रखर होती है तथा मन में वैराग्य का संचार होता है । ç की शक्ति से काम-क्रोध का नाश होता है । समाज में मनुष्य का आत्माविश्वास बना रहता है । अधीरता का नाश एवं चेहरे पर कान्ती पैदा होती है ।
ç शब्द को उच्चरण की दृष्टि से समझा जाने को ओम में तीन वर्णों का समावेश है । अ, उ, म ये तीनों वर्ण्र्ाापनी ही विशालता लिये हुए है । ‘अ’ शब्द का उच्चारण करने से श्वास व दमा रोग से निजात मिलती है । ‘अ’ शब्द के उच्चरण से ही ओज एवं शक्ति का विकास होता है । ‘उ’ शब्द के उच्चारण से यकृत पेट एवं आंतों पर अच्छा प्रभाव पडÞता है, इससे कब्ज की समस्या दूर होने लगती है । ‘म’ शब्द के उच्चारण से मानसिक शक्ति विकसित होती है ।
अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान द्वारा किये गये एक रिर्सच अनुसार ओम के उच्चारण से नाभि से लेकर मस्तिष्क तक धमनियाँ सामान्य होने लगती है, इससे रक्त प्रवाह सामान्य हो जाता है, जिससे ओम का असर नकरा नहीं जा सकता है । हमारे शास्त्रों के अनुसार किसी भी मन्त्र के उच्चारण से पर्ूव या आरम्भ में ç के ना होने से वह मंत्र निष्फल माना जाता है । किसी भी मन्त्र में ç जुडÞने से मंत्र की शक्तियाँ कई गुना बढÞ जाती है । ç शिव रुप है और मन्त्र शक्ति रुप है । इन दोनों के संयुक्त रुप से उच्चारण करने से मनुष्य को अनेक सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं ।





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