सही नीति नहीं बनायी गयी तो सारे उद्योग धरासायी हो जाएंगे

माननीय अशोक वैध नेपाल के औद्योगिक नगरी बीरगंज के जाने माने प्रतिष्ठित उद्योगपति हैं । आप बीरगंज महानगरपालिका के सद्भावना दूत, नेपाल भारत सहयोग मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के साथ ही कई प्रतिष्ठित संस्थाओं से आबद्ध हैं । सामाजिक कार्यों में आप सहृदयता के साथ भाग लेते हैं । नेपाल नरेश स्व. बीरेंद्र वीर विक्रम शाह देव द्वारा देवी प्रकोप पीडि़त पदक द्वारा सम्मान, लायन्स अंतरराष्ट्रीय अमेरिका द्वारा सामाजिक सेवा के लिए कदर पत्र, स्वामी विवेकानंद स्मृति सम्मान, प्रतिभा सम्मान २०१७ आदि कई सम्मानों से आप देश–विदेश में सम्मानित हो चुके हैं ।
दो नम्बर प्रदेश की वर्तमान परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में आपसे हिमालिनी संवाददाता मुरली मनोहर तिवारी (सीपू) ने बातचीत की, जिसका संपादित अंश आपके समक्ष प्रस्तुत है–
० सीमेंट बनाने में आवश्यक मुख्य पदार्थ क्लिंकर के ढुवानी का कोई रास्ता निकला ?
अभी तक कोई समाधान नही निकला, नेपाल सरकार से अनुरोध किया है, नेपाल एक भुपरिवेक्षित मुल्क है, जिसका मुख्य नाका बीरगंज है, लाइफलाइन है । यहाँ की इंडस्ट्री बंद के कगार पर है, उत्पादन लागत भी कापÞmी बढ़ गयी है, ऐसी स्थिति बनी हुई है कि इसके बंद होने से हजारों श्रमिक बेरोजगार हो जाएंगे । ठीक है, क्लिंकर ढुवानी में प्रदूषण की समस्या है, लेकिन जब भारत सरकार का रेल मंत्रालय हमसे ढुवानी खर्च लेता है, तो प्रदूषण का ब्यवस्थापन करने की जिम्मेदारी भी उसी की है । हालांकि रेल मंत्रालय ने देरी से ही सही, रक्सौल में प्रदूषण नियंत्रण के लिए पानी की व्यवस्था कर दिया है, इसलिए मेरा भारत सरकार से अनुरोध है कि जब तक वैकल्पिक व्यवस्था नही हो पाता तब तक रक्सौल से ढुवानी चालू कर दिया जाए ।
० अगर रक्सौल से क्लिंकर नही आता और वीरगंज में भी विरोध हो तो कैसे चलेगा ?
बीरगंज में जो विरोध हो रहा है, वह राजनीतिकरण के तहत हो रहा है, क्योंकि यहाँ प्रदूषण की वैसी अवस्था नही है । हालांकि मेरा मानना है कि बीरगंज में प्रदूषण की वैसी अवस्था आने से पहले ही उचित व्यवस्थापन करके ही क्लिंकर मंगाया जाएं, तब तक के लिए रक्सौल से ही लाया जाए ।
० रक्सौल या बीरगंज से लाने में सीमेंट के मूल्य में क्या अंतर आएगा ?
दोनों जगह से लाने में सीमेंट के मूल्य में कोई अंतर तो नहीं आएगा, हां देरी होने या दूसरे नाका से लाने पर जरूर अंतर आएगा ।
० मधेश आंदोलन में नाका बंदी और चुनाव के बाद व्यापार की क्या अवस्था है ?
बंदी और चुनाव के बाद ब्यापार अपने सुचारू गति में आ तो गया है, लेकिन अब राजधानी का बवाल आ गया है । दो बार करके दो दिन बंदी हो चुका है, आगे और भी हो सकता है, जिसका असर व्यापार पर पड़ेगा ।
० राजधानी के संबंध में आपकी धारणा क्या है ?
राजधानी के लिए देखना चाहिए कि भौतिक संरचना कहा मजबूत है । बीरगंज आर्थिक क्षेत्र है, नेपाल का प्रवेश द्वार है, बीरगंज बुनियादी ढांचे से मजबूत है । बीरगंज काठमांडू से भी नजदीक है, उस हिसाब से बीरगंज ही राजधानी होनी चाहिए ।
० लेकिन अभी तो राजधानी जनकपुर कÞायम कर दिया गया है ?
राजनीतिक कारण से किया गया, यहाँ के नेता की उतनी पहुँच नहीं हो सकी । ये समस्या सिर्फ बीरगंज या जनकपुर की नही है, हरेक प्रदेश के राजधानी के नाम को लेकर है । इसके लिए सरकार को पूर्ण गृहकार्य करके राजधानी घोषणा करनी चाहिए थी । जैसे अभी बीरगंज को राजधानी घोषणा कर देता फिर एक नया शहर बना कर उसको राजधानी कर देता । इसी प्रकार सातों प्रदेश में सात नए शहर बनते ।
० नया शहर बसाना इतना आसान है क्या ?
उदाहरण के लिए, नवलपुर के पास सागरनाथ वन परियोजना है, जिसके पास छौ हजार बिगहा जमीन है, उसमे हजार बिगहा में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्री का कार्यालय, निवास, सचिवालय, कार्यालय, विधानसभा भवन, अस्पताल, स्टेडियम, कॉलेज, स्कूल सब बन जाएगा, बाकी जमीन को सरकार प्लॉटिंग करके स्मार्ट ग्रीन सिटी बनाकर बेच दे, उसी पैसे से सारा निर्माण खर्च आ जाएगा ।
० क्या अन्य जगह के लिए जनकपुर और बीरगंज मानेगा ? क्या राजधानी बदली जा सकती है ?
ये दोनों के बीच मे पड़ता है, अंतर्राष्ट्रीय राजमार्ग, हवाई मार्ग, द्रुत मार्ग भी पड़ता है, इसलिए मान जाना चाहिए । राजधानी के संबंध में बृहत अंतर्कि्रया करके मापदंड तय होने चाहिए । विश्व में कई जगह राजधानी बदली गई है । पहले भारत की राजधानी कोलकाता फिर आगरा, फिर दिल्ली से नई दिल्ली हुई । उ.प्र की इलाहाबाद से लखनऊ हुई । पाकिस्तान की राजधानी रावलपिंडी से इस्लामाबाद हुई । चीन की राजधानी शंघाई से पीकिंग फिर बीजिंग हुई । कई जगह तो दो दो राजधानी है, इस प्रकार का विकल्प भी हो सकता है, जैसे महाराष्ट्र की राजधानी आठ महीना मुंबई है तो चार महीना नागपुर है । इसी प्रकार जनकपुर को धार्मिक राजधानी, बीरगंज को आर्थिक राजधानी बना कर कोई नया शहर बना कर मुख्य राजधानी बना सकते हैं ।
० प्रांतीय सरकार से क्या अपेक्षा है ?
प्रदेश के अंदर अभी तक सरकार नहीं बनी है, पहले सरकार का दृष्टिकोण आना चाहिए कि उनका रोडमैप क्या है, उसमे हमलोग कुछ सुझाव दे सकते हंै । अभी तो बच्चा शिशु अवस्था मे है, जिसे नर्सरी से शुरू करना है, क्योंकि २ न.प्रदेश के पास कोई संसाधन नही है, इस मामले में ये सबसे गरीब प्रदेश है । यह एक मरुस्थल है । इसके लिए केंद्र क्या पॉलिसी बनाती है । देश के ७०५ उद्योग का निवेश इसी प्रदेश में है, अगर सही नीति नही बनायी गयी तो सारे उद्योग धरासायी हो जाएंगे ।
जहाँ तक सुझाव और अपेक्षा की बात है तो संभावनाएं बहुत है, कोशी नदी में हरेक साल बाढ़ आती है, जो भारत मे भी तबाही मचाती है, उसे यदि बागमती से जोड़ दिया जाए तो बाढ़ भी रुकेगी और पानी का कृषि और अन्य कार्य मे सदुपयोग भी होगा ।
पर्सा वन आरक्षण को सौराहा के तजर्Þ पर विकसित कर पर्यटन केंद्र बना सकते हैं । गढ़ी माई, सिमरौन गढ़, बहुआरवा भाठा, पारस नाथ का मंदिर जिसके नाम पर पर्सा जिÞला बना, इन सब को पर्यटन स्थल बना सकते हंै । सगरमाथा आरोहण के लिए पर्यटक काठमांडू मार्ग से आते हंै, अगर कटारी से राजमार्ग विकसित किया जाय तो राज्य को कितना ज्यादा लाभ होगा । जनकपुर में रामायण सर्किट बनने की बात हो रही है, उसे धार्मिक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है । मेरा जनकपुर से कोई भेदभाव नही है, पर मेरा मानना है कि जनकपुर का धार्मिक महत्व है, उसकी अपनी गरिमा है, उसे बचाए रखने की जरूरत है ।

