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फौजदारी अभियोग के सम्बन्ध में एमाले द्वारा संशोधन प्रस्ताव पेश

 

काठमांडू, ८ मर्य । फौजदारी अभियोग से आरोपित सांसद को पद से निलम्बित करना चाहिए, इस तरह की व्यवस्था के लिए मांग करते हुए नेकपा एमाले ने ‘प्रतिनिधिसभा सदस्य नियमावली, २०७५’ में संशोधन प्रस्ताव पेश किया है । मस्यौदा समिति में पार्टी द्वारा व्यक्त विचारों को यथावत रखते हुए नेकपा एमाले की ओर से सांसद दमोदर भण्डारी, भैरवबहादुर सिंह और नरबहादुर थामी ने प्रतिनिधिसभा कार्य व्यवस्था समिति में संशोधन प्रस्ताव पेश किया है ।
उन लोगों ने संशोधन प्रस्ताव में कहा है कि तीन साल अथवा उससे अधिक कैद सजाय होनेवाले अथवा नैतिक पतन संबंधी अभियोग से अरोपित सांसद स्वतः निलम्बित होना चाहिए । ‘प्रतिनिधिसभा सदस्य नियमावली, २०७५’ की दफा २४३ की ३ में लिखा है– ‘फौजदारी अभियोग से आरोपित सांसद को कैद अवधि तक संसद सदस्य के रुप में कोई भी अधिकार नहीं मिलेगी, उक्त अवधि तक निजकी पारिश्रमिक, सेवा और सुविधा को स्थगित की जाएगी ।’ उल्लेखित शब्दावली के बदले ‘तीन साल अथवा उससे ज्यादा कैद सजाय प्राप्त होनेवाला अथवा नैतिक पतन संबंधी फैजदारी अभियोग से आरोपित सांसद स्वतः निलम्बन होते हैं’ रखने के लिए एमाले की ओर से संशोधन प्रस्ताव पेश की गई है ।
नियमावली मस्यौदा समिति में एमाले फौजदारी अभियोग से आरोपित सांसद को निलम्बन करने की पक्ष में थी, लेकिन नेपाली कांग्रेस, माओवादी केन्द्र, राजपा और फोरम इसके विरुद्ध होने के कारण सेवा–सुविधा स्थगित संबंधी व्यवस्था रखकर मध्यमार्गी प्रावधान में सहमति की गई थी ।

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