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राष्ट्रीय सुनतन्त्र पार्टी से जनता की अपेक्षा ? : कैलाश महतो 

 
कैलाश महतो, पराशी 15 अप्रैल 026। वर्तमान सरकारी मन्त्रियों के सोनेरंग की सम्पत्तियों से नेपाली ही ही, नेपाल और नेपाली ZenZ विद्रोह को जानने बाली दुनिया भी हत्तप्रभ और आश्चर्यचकित है। कुशासन के विरुद्ध सुशासन और भ्रष्टाचार विरुद्ध सदाचार के लिए तकरीबन सात दर्ज़न भर नवयुवाओं की बर्बर शहादत, तीन हजार के करीब घायल युवा तथा देश के अनमोल धरोहरों के बलिदानी समेत से निर्मित प्रधानमंत्री बालेन के ZenZ सरकार में मन्त्री रहे मन्त्रियों ने अपने को पूरे के पूरे सोने से रंग/ढक रक्खा है।
जमीनी जायदाद की फेहरिस्त को देखें तो अधिकांश मन्त्रीगण इस एक्स्ट्रीम भू-वितरित तथा भू-अभाव के ज़माने में भूमि सुधार नीति के विपरीत समान्ति युग के सामन्ति जमींदारों के भू-दादागिरी इस पैसेवादी अत्याधुनिक युग में भी विराजमान दिखते हैं।
आश्चर्य की बात तो यह है कि ताउम्र मेहनत मजदूरी और एक एक पाई जोड़कर भी जीवन में समान्य आदमी उतने सम्पत्ति नहीं जोड़ पाते, जितना ये नवयुवा और युवा मन्त्री साहेब लोग इकट्ठे कर चुके हैं। गौर करने बाली बात यह भी है कि माँ बाप के पसीनों पर स्कूलों और विश्वविद्यालयों में पढ़ते हुए ZenZ विद्रोह करने बाले युवाओं के पास भी सोने के खदान, अपार जमींनें और करोड़ों के रकम उपलब्ध है।
ताज्जुब की बात यह भी है कि आजसे कुछ दशक पहले तक तराई-मधेश में बड़े बड़े जमींदार रहे थारु समुदाय की मन्त्री रही गीता चौधरी के पास क्रमशः ५ और ९ तोला सोना और चाँदी लगायत के समान्य सम्पत्ति होना और शोषित वादी समुदाय से मन्त्री रही सीता वादी के पास  १८ तोला सोना, १५ तोला चाँदी, एनआइसी बैंक में १५ लाख रुपैयाँ, स्कुटर और पल्सर मोटरसाइकल, ३/३ ल्यापटप और मोबाइल दिखते हैं। गंभीर बात फिर यह भी है कि सीता जी की सारी कमाई की श्रोत अमेरिकी फण्ड से संचालित बारबरा फाउन्डेसन, हामी नेपाल, अमेरिकी युथ काउन्सिल, भाग्य न्यौपाने और जेन्जी आन्दोलन हैं जिन्हें उन्होंने खुद उल्लेख की हैं।
गौर तलब है कि तकरीबन हजार तोले के सोने, असंख्य किलो चाँदी और करोड़ों के हीरे के साथ समान्ती भूमिदारों को याद दिलाने बाला यह बालेन सरकार कैसा सुशासन और समृद्धि ला पायेगी। इस सरकार के आर्थिक चेहरों ने इस बात को स्पष्ट कर दी है कि राजनीति केवल करोड़पतियों के ही इर्द गिर्द नाचने बाली नर्तकी रहेगी।
जिन चेहरों पर भर्खर दाढ़ी और मुंछे पनप रहे हैं, उन ZenZ नव युवाओं के पास भी करोड़ों के बहुमूल्य धातु, जमीन दिख रहे हैं, क्या वो सम्पत्ति उनके अकेले के हैं या उसके पूरे परिवार के, भाई पटिदार समेत के या कुछ अलग चाल है? अगर वे सम्पत्ति उन्हीं के हैं तो उसका श्रोत क्या है? अपने मातापिता और घर परिवार के मेहनत पर पढ़ने लिखने और जीने खाने बाले स्कूली और विश्व विद्यालयीय बच्चों के पास वे सम्पत्ति आये कहाँ से?
कुछ मंत्रियों के पास रहे सम्पत्तियाँ चन्द राजनीतिक व प्रशासनिक पदों, अवधियों और अवसरों में कैसे आर्जित हुए, उसपर गहन विश्लेषण और अनुसंधान जरुरी है। उनके पास अगर इतने जायदाद रहे हैं तो फिर सरकार को सम्पत्ति कर देने से परहेज क्यों रहा?
सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक एक विश्लेषक को माने तो सरकार का यह षड्यंतान्त्रिक फेहरिस्त है जिसमें बड़े सूझबूझ से मंत्रियों के सम्पत्तियों को कृतिम रुप से बढ़ाया गया है ता कि चुनाव में हुए करोड़ों की टिकट खरीद बिक्री तथा चुनावी खर्चोँ को सरकार में रहते हुए जुगाड़ कर ली जाये। अन्तर्य का सुन्दर सा साजिस बस् इतना है कि सार्बजानिक किए गये मन्त्रियों के सम्पत्तियों के अनुसार सम्पत्ति जोड़ लिए जाएँ।
अगर उनके पास वाकई वे जायज सम्पत्तियाँ हैं तो बहुमूल्य सारे धातुई सम्पत्ति जनता के सामने उजागर कर सरकारी बैंकों में सुरक्षित रखें और उसका सारा सुरक्षा बीना कोई कीमत सम्बन्धित बैंक या वित्तीय संस्था करेंगी। भूमि के हक़ में सरकार द्वारा दी गई भू-स्वामित्व के दायरे में लानी चाहिए। नहीं तो भ्रष्टाचार और कुशासन अन्त्य के नाम पर देश और जनता पर छुईमुई सा नये भ्रष्टाचार और कुशासन थोपने का साजिस है।

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