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नेपाल पर चीन का दबाव: तिब्बत-ताइवान गतिविधियों को लेकर काठमांडू से ‘स्पष्ट आश्वासन’ की मांग

 

काठमांडू, 15 अप्रैल। नेपाल में तिब्बत और ताइवान से जुड़ी गतिविधियों को लेकर चीन ने एक बार फिर अपनी चिंता जताई है। नेपाल के लिए चीन के राजदूत (चाङ माओमिङ) ने सोमवार को नेपाल के गृहमंत्री से मुलाकात कर इन मुद्दों पर “अनौपचारिक लेकिन स्पष्ट” बातचीत की और काठमांडू से यह सुनिश्चित करने को कहा कि नेपाल की जमीन चीन-विरोधी गतिविधियों का मंच न बने।

बैठक में मौजूद अधिकारियों के अनुसार चीनी राजदूत ने खास तौर पर नेपाल में रह रहे तिब्बती शरणार्थियों की गतिविधियों, उनकी स्थिति और नेपाल में संभावित “पृथकतावादी गतिविधियों” को लेकर चिंता व्यक्त की।

ताइवान के झंडे पर भी जताई आपत्ति

राजदूत ने हाल ही में काठमांडू में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान कुछ समय के लिए ताइवान का झंडा दिखाए जाने की घटना पर भी ध्यान आकर्षित कराया।

यह घटना 28 मार्च को आयोजित 13वें अंतरराष्ट्रीय लोक महोत्सव के दौरान हुई थी, जिसे “एवरेस्ट नेपाल कल्चरल ग्रुप” ने आयोजित किया था। इस कार्यक्रम में ताइवान सहित 11 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। कार्यक्रम में कुछ समय के लिए ताइवान का झंडा दिखाया गया था, जिसे विरोध के बाद हटा दिया गया।

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चीन लंबे समय से ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसके स्वतंत्र प्रतीक या झंडे के उपयोग का विरोध करता है।

 तिब्बती नेतृत्व के कार्यक्रम पर भी चीन की नजर

बैठक में चीन की सबसे बड़ी चिंता आगामी 27 मई को भारत के धर्मशाला में होने वाले केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के प्रमुख के दूसरे कार्यकाल के शपथ समारोह को लेकर थी।

चीनी राजदूत ने नेपाली गृहमंत्री से अनुरोध किया कि नेपाल सरकार का कोई भी प्रतिनिधि उस समारोह में शामिल न हो। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि तिब्बती प्रशासन नेपाल को निमंत्रण भेज सकता है, इसलिए इस मुद्दे पर पहले से सावधानी बरतने की जरूरत है।

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 नेपाल ने दोहराई “वन-चाइना नीति”

बैठक में गृहमंत्री ने चीन को आश्वस्त करते हुए कहा कि नेपाल अपनी पुरानी “वन-चाइना नीति” पर कायम है और नेपाल की भूमि चीन के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि नेपाल अपनी संप्रभुता और भौगोलिक अखंडता के प्रति प्रतिबद्ध है और किसी भी विदेशी शक्ति का मोहरा नहीं बनेगा।

 कूटनीतिक पृष्ठभूमि: बढ़ती संवेदनशीलता

विश्लेषकों के अनुसार यह बातचीत नेपाल में पिछले वर्ष हुए जेन-जी आंदोलन के बाद बदले राजनीतिक माहौल और कूटनीतिक गतिविधियों से जुड़ी चीन की बढ़ती चिंता को भी दर्शाती है।

सोशल मीडिया पर “TOB” लिखे जैकेट पहने कुछ युवाओं के वीडियो वायरल होने के बाद यह आरोप लगा था कि कुछ समूह तिब्बती शरणार्थियों से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि सरकार ने ऐसे आरोपों की पुष्टि नहीं की है।

दलाई लामा की बधाई से भी असहज हुआ बीजिंग

नेपाल में नई सरकार बनने के बाद तिब्बती आध्यात्मिक नेता और तिब्बती प्रशासन के प्रमुख ने नेपाली प्रधानमंत्री को बधाई संदेश भेजा था।

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कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन घटनाओं से भी बीजिंग की संवेदनशीलता बढ़ी है और चीन नेपाल की राजनीतिक दिशा को करीब से देख रहा है।

नेपाल के पूर्व राजदूत के अनुसार हाल के महीनों में नेपाल में कुछ गतिविधियों को चीन “चीन-विरोधी माहौल” के संकेत के रूप में देख रहा है।

निष्कर्ष

नेपाल के लिए यह स्थिति संतुलन की बड़ी कूटनीतिक चुनौती बन सकती है। एक ओर चीन की सुरक्षा और राजनीतिक संवेदनशीलताएँ हैं, तो दूसरी ओर नेपाल की स्वतंत्र विदेश नीति और लोकतांत्रिक माहौल।

ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नेपाल किस तरह चीन की चिंताओं को संबोधित करते हुए अपनी कूटनीतिक स्वतंत्रता और संतुलन बनाए रखता है।

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