पूर्व सेनापति से लेकर पूर्वमन्त्री तक ‘व्ल्याक लिष्ट’ में
काठमांडू, २८ मई । सशस्त्र द्वन्द्व काल में मानव अधिकार हनन के लिए गम्भीर दोषी के ऊपर राष्ट्रीय मानवअधिकार आयोग ने अपना कारवाही आगे बढ़ाया है । वि.सं. २०५७ जेठ महिना से दर्ज शिकायत के आधार में दोषी को कारवाही करने के लिए आयोग ने सरकार को सिफारिश किया था । लेकिन सरकार द्वारा कारवाही न होने के कारण आयोग ने उन लोगों की नाम अब ‘व्ल्याक लिष्ट’ में रखने की तैयारी की है । इस तरह ‘व्ल्याक लिष्ट’ में पड़नेवालों में पूर्व सेनापति से लेकर पूर्व मन्त्री तक हैं । यह समाचार आज प्रकाशित नयां पत्रिका दैनिक में है ।
आयोग की १८ वें वार्षिकोत्सव के अवसर पर आइतबार आयोजित कार्यक्रम में आयोग के अध्यक्ष अनुराज शर्मा ने कहा कि मानव अधिकार उल्लंघन में दोषी ठहर व्यक्तियों का नाम सार्वजनिक करने की तैयारी में आयोग लग गया है । आयोग ने निर्णय किया है कि गम्भीर मानव अधिकार हनन करनेवाले सौ व्यक्तियों का नाम ‘व्ल्याक लिष्ट’ में रखा जाएगा । आयोग के अनुसार आयोग ने ८१७ व्यक्तियों को नाम मानव अधिकार उलंघनकर्ता के रुप में सिफारिश कर सरकार को कारवाही करने के लिए कहा था । लेकिन उसमें दो सौ व्यक्तियों के ऊपर अभी तक कोई भी कारवाही नहीं हुई है । यहां तक कि मानव अधिकार हनन के लिए गम्भीर दोषी को सरकार ने पदोन्नती तक किया है ।
स्मरणीय है, आयोग ने पूर्व प्रधान सेनापति प्याराजंग थापा सहित ३३ सैनिक अधिकारी, पूर्व राज्यमन्त्री सूर्यमान दोङ, धनुषा जिला के तत्कालीन डिएसपी कुवेरसिंह राना, नेपाली सेना के तत्कालीन मेजर अनुप अधिकारी, धनुषा जिला के तत्कालीन प्रमुख जिला अधिकारी रेवतीराज काफ्ले, धनुषा के ही तत्कालीन एसएसपी चूडाबहादुर श्रेष्ठ आदि को कारवाही के लिए सिफारिश किया था । उन लोगों में से अभी अधिकांश अधिकारियों ने अवकास ले चुके हैं, लेकिन अभी तक किसी के ऊपर कारवाही नहीं हुआ है । इसीलिए आयोग ने उन लोगों की नाम ‘व्याल्क लिष्ट’ में रखने की तैयारी की है ।

