प्रदेश नं. २ में मैथिली को कामकाजी भाषा बनाया जा सकता हैः मुख्यमन्त्री राउत
जनकपुरधाम, २ जुलाई । प्रदेश नं. २ के मुख्यमन्त्री लालबाबु राउत ने कहा है कि ‘मैथिली’ भाषा को प्रदेश नं. २ में सरकारी कामकाजी भाषा के रुप में प्रयोग किया जा सकता है । भाषा आयोग द्वारा जनकपुर में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए मुख्यमन्त्री राउत ने कहा कि प्रदेश नं. २ में सबसे अधिक ‘मैथिली’ भाषा बोली जाती, इसीलिए यहां मैथिली को ही सरकारी कामकाजी भाषा के रुप में प्रयोग करना ठीक रहेगा ।
मुख्यमन्त्री राउत को मानना है कि मातृभाषा की प्रयोग से ही अधिकांश देशों ने तरक्की की है । उन्होंने कहा– ‘विश्व में जिस देश में मातृभाषा को प्राथमिकता दी गई है, वही देश विकास के सवाल में सबसे आगे है । चीन और जापान इसका उदाहरण है ।’ विकास के लिए भी स्थानीय मातृभाषा को प्राथमिकता देने के लिए आग्रह करते हुए मुख्यमन्त्री राउत ने आगे कहा– ‘हम लोगों को सहज भाषा को प्रयोग करन चाहिए, प्रदेश में सबसे अधिक मैथिलीभाषी हैं तो यहां सरकारी कामकाज के लिए मैथिली का ही प्रयोग किया जा सकता है ।’
उन्होंने यह भी कहा कि अगर प्रदेश नं. २ में मैथिली भाषा को सरकारी कामकाज की भाषा बनाया जाता है तो उससे अन्य भाषा को कोई भी अपमान नहीं होगा । उनका यह भी मानना है कि यहां हिन्दी को भी सम्पर्क भाषा के रुप में आगे बढ़ाया जा सकता है ।

