प्रेमचंद की जयंती: धनिया, होरी, घीसू …आज भी सब वहीं के वहीं खड़े हैं…
अशोक मिश्र | महाराष्ट्र का एक बड़ा हिस्सा विदर्भ कहलाता है, जो कि आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से बेहद पिछड़ा हुआ है। इसकी एक वजह यह भी है कि इस संभाग में बड़े उद्योग नहीं है। विदर्भ ही वह हिस्सा है, जहां से आए दिन किसान आत्महत्या की खबरें उनकी दारुण स्थिति को बयां करती हैं। 31 जुलाई को हिंदी के महत्वपूर्ण कथाकार प्रेमचंद की जयंती है। प्रेमचंद एक ऐसे लेखक रहे, जिन्होंने किसानों के दुख-दर्द को अपनी रचनाओं में सबसे अधिक उकेरा है।


