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मिश्र प्रधानन्यायाधीश में अनुमोदन, न्यायालय के प्रति जनआस्था वृद्धि करने की प्रतिबद्धता

 

काठमांडू, ११ सितम्बर । प्रधानन्यायाधीश में सिफारिश ओमप्रकाश मिश्र प्रधानन्यायाधीश में अनुमोदन हुए हैं । संसदीय सुनुवाई विशेष समिति ने सोमबार मिश्र का नाम अनुमोदन किया है । संसदिय सुनुवाई के क्रम में उन्होंने कहा था कि अगर वह प्रधानन्यायाधीश बनेंगे तो न्यायालय के प्रति आम जनता में जो अविश्वास है, उसको खत्तम कर जनआस्था में वृद्धि करेंगे । इसके लिए वह न्यायालय में होनेवाला भ्रष्टाचार को अन्त करेंगे । अपने विरुद्ध पंजीकृत उजुरी के संबंध में संसदीय सुनुवाई समिति में जवाफ देते हुए उन्होंने ऐसी प्रतिबद्धता व्यक्त की है ।
संसदीय सुनुवाई समिति में प्रस्तावित प्रधानन्यायाधीश मिश्र ने कहा– ‘न्यायालके प्रति जनआस्था वृद्धि करना और न्यायिक कामकारवाही को प्रभाकारी बनाने के लिए अनुगमन और भ्रष्टाचार अन्त्य के लिए मैं काम करुंगा ।’ न्यायपालिका में भी समावेशीता संबंधी मुद्दा में उन्होंने कहा कि वह संविधान की मर्म अनुसार ही आगे बढ़ेगे । उन्होंने कहा कि जिसके पास न्यायाधीश बनने की योग्यता है, उसी में से वह न्यायापालिका को समावेशी बनाने की कोशीश करेंगे ।
शैक्षिक प्रमाणपत्र विवाद के संबंध में मिश्र ने कहा है कि उन्होंने सन् १९६९ में एसएलसी किया है और १९७१ में आईएसी किया है । मिश्र ने कहा कि उन्होंने गोरखपुर से बीएससी किया है काठमांडू से डिप्लोमा और दिल्ली से स्नातककोत्तर किया है ।

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