दशहरा और जौ के जवारे का रस : डा. रामदेव पंडित
हिमालिनी,अंक अक्टूबर २०१८ | आश्विन मास को नवरात्र का मास कहा जाता है । नवरात्र यानि दशहरा, जिसको नेपाल में दशैं कहा जाता है । दस दिन तक मनाये जानेवाला इस पर्व का नेपाल में अपना बिशेष स्थान और महत्व है । दशहरा में घटस्थापना के दिन विधि पूर्वक कलश का स्थापना किया जाता है । कलश जिस स्थान पर स्थापना किया जाता है, वहाँ बालु रखकर उसमे गेहुँ या जौ बोया जाता है । बोया गया गेहुँ दस दिन के वाद जवारे(जयन्ती) बन जाता है । विजया दशमी के दिन उस जवारे को सिर वा कान के ऊपर धारन किए जाने की परम्परा रही है ।
दशहरा में लगाये जाने वाला जवार का अपना धार्मिक महत्व रहा होगा पर जवारे का महत्व स्वास्थ्य के दृष्टि से अत्याधिक रहा है । अनुसन्धानों के मुताबिक जवारे का रस शरीर के लिये अत्यन्त हितकारक है । ये केवल शरीर को उर्जा ही नही देता है बल्कि शरीर से विजातीय पदार्थों का निस्कासन करता है । साथ ही कैंसर जैसी बिमारी मे भी अति प्रभावी माना गया है । इसीलिये इसको ग्रीन ब्लड भी कहा जाता है ।
दशहरा में जिस तरीके से जवारे उगाया जाता है ठीक उसी तरीके से अन्य और समय एवं स्थान पर भी उगाया जा सकता है ।
गेहुँ का जवारे को प्रकृति का अनमोल देन माना गया है, क्यों ?
क्योंकि ये अमीनो एसिड, इन्जाइम, विटामिन और प्रोटिन का अच्छा स्रोत है । ये सब पोषक तत्व शरीर का मृत्त कोशिकाओं को पुनर्र्जीवन देता है साथ ही रक्त का पीएच लेभल को सन्तुलित रखता है ।
गेहुँ का जवारे का रस भेज वा ननभेज खाने से भी ज्यादा गुणकारी एवं फाईदा कारक होता है । जवारे शरीर में अक्सिजन के अभाव की भी पुर्ति करता है । शरीर का उर्जा बढ़ाता है । ये शरीर का कमजोरी भी दूर करता है ।
तो क्या क्या है इसका फायदा ?
हेमोग्लोबिन बढ़ाता है ः गेहुँ के जवारे के रस से शरीर की रक्त संचार प्रक्रिया चुस्त रहती है । इससे शरीर में नया रक्त बनता है । और पुराना रक्त विस्थापित होता है । साथ ही साथ शरीर में हेमोग्लोबिन की मात्रा भी बढ़ाता है ।
त्वचा को जवान रखना ः त्वचा को जवान, चमकीला, मुलायम रखने के लिये गेहुँ के जवारे का रस एकदम ही प्रभावकारी होता है । क्योंकि इसमें प्राकृतिक न्यूट्रिशन और एन्टि अक्सिडेन्ट भरपूर मात्रा में पायी जाती है । इन तत्वों से शरीर में बुढ़ापा नही आता है । नियमित रूप से ये पेय पीने से त्वचा हाइड्रेट रहता है । त्वचा के दाग, धब्बा भी हट जाता है । त्वचा का रिङ्कल भी दूर हो जाता है ।
केश को काला और स्वस्थ्य रख्ता है ः किसी किसी का केश असमय ही सफेद हो जाता है, पैड़ फटने लग्ता है , रुखा हो जाता है, बाल झड़ने की समस्या भी बहुतां को ही होता है । यदि दैनिक रूप से गेहुँ के जवारे को जूस पीने से ये तमाम केश की समस्यायें दूर हो जाती है ।
ब्लड शुगर नियन्त्रण करता है ः मधुमेह नियन्त्रण के लिये भी गेहुँ के जवार का रस पीना लाभदायक रहता है । इससे रक्त में ग्लूकोज की मात्रा नियन्त्रण में रहता है ।
कैंसर का उपचार ः गेहुँ के जवारे के रस में क्यान्सर प्रतिरोधी क्षमता होती है । इसमें रहे क्लोरोफिल से कैंसर की कोशिकाएँ नही बढ़ पाती है । किमोथेरापी वा रेडियोथेरापी के क्रम में भी ये पीने की सलाह दी जाती है ।
कब्जियत का उपचार ः कब्जियत की समस्या झेल रहा मरीज भी इसका रस नियमित सेवन करके कब्ज को दूर कर सकता है । जवारे के रस शरीर के पाचन क्रिया को भी चुस्त रखता है ।
अन्य लाभः
ये रस मोटेपन को भी नियन्त्रण करने मे मदद करता है ।
जले हुए वा कटे हुए घाव में गेहुँ के जवारे औषधी के रूप मे कार्य करता है ।
उच्च रक्तचाप के रोगियों को नियमित रूप से जवारे रस का सेवन करना चाहिये ।
गले का कोई भी इन्फेक्सन कम करने में ये उपयोगी होता है ।
कब पीना चाहिये ?
ये रस पीने के लिये कोई निश्चित समय नही होता है । पर, ये जूस पीने से पहले आधा घण्टा आगे और पीछे कुछ भी पीना नही चाहिये । सुबह खाली पेट में गेहुँ के जवारे का रस पीना ज्यादा फायदाजनक होता है । ठण्डा, सर्दी, सर दर्द, झाडा, कब्ज के समय भी गेहुँ के जवारे बहुत ही फायदेमन्द माना जाता है ।
क्या मिलता है गेहुं के जवारे में ?
जवारे एक अच्छा आहार भी है । खासक रके गेहुँ का जवारा उगाकर नियमित रूप से सेवन करने से बहुत ही अच्छा स्वास्थ्य बनता है । क्योंकि इसमें पाये जानेवाला पोषक तत्व क्लोरोफिल, प्रोटिन, विटामिन, फाइबर, कैलसियम और कार्बोहाइड्रेट्स आदि हमारे शरीर के लिये अत्यन्त आवश्यक तत्व हैं ।
क्या लाभ मिलता है ?
गेहुँ के जवारे के जूस सेवन करने से स्वास्थ्य मध्यम से उत्तम हो जाता है । रोगी स्वस्थ्य बन जाता है । खासकर के मुँह तथा दाँत सम्बन्धी समस्याओं को दूर करने के लिये, रक्त में चीनी के मात्रा को नियन्त्रित करनेके लिये, पाचन यन्त्र को तगड़ा बनाने के लिये, जिगर को स्वस्थ्य रखने के लिये तो जवारे का रस और भी उपयोगी होता है । उसके साथ साथ बहुतों को त्वचा की समस्या और केश की समस्यायां मेें भी गेहुँ का जवारे लाभदायक माना गया है ।
कैसे बनता है गेहुं के जवारे का जूस ?
गेहुँ का जवारे वैसे भी चबा चबाकर सेवन किया जा सकता है । साथ ही इससे रस निकालकर भी पिया जा सकता है । गेहुँ के जवारे का जूस बनाकर पीने से और भी स्वादिष्ट होता है ।
१. आठ से दश गेहुँ के जवारा जड़से काटकर अच्छा से धोना चाहिये । उसके बाद उसको कूट कूटकर रस निकालना चाहिये ।
२. उसके बाद उसको एक साफ कपडेÞ में रखकर रस छानना होता है । उसके बाद रस को किसी गिलास में रखना पड़ता है ।
३. जवारे के रस में थोड़ा तुलसी का रस रखकर उसको आदि और शहद के साथ पीने के लिये तैयार किया जाता है ।
४. ये जूस में थोड़ा जल मिलाकर पीना चाहिये ।
कितना पीना चाहिये ?
– अगर कोई रोग से ग्रसित हो तो प्रतिदिन तीस से पचास एमएल जूस पीना उपयुक्त रहता है । (दिनमे दो बार )
– शुरुवात में गेहुँ का जवारे का रस थोड़ा थोड़ा पीना चाहिये फिर क्रमसः धीरे धीरे बढ़ाना चाहिये ।
– एक हप्ता में कम से कम पाँच दिन तक इसका सेवन करना चाहिये ।
कैसे उगाएं गेहुं का जवारे ?
– अग्र्यानिक बीज का प्रयोग करना चाहिये ।
– सबसे पहले गेहुँ के बीज को एक बर्तन में आठ से दस घण्टा तक जल मे भिगोकर रखना चाहिये ।
– अब किसी गमला में थोड़ी मिट्टी रखकर उक्त गमला में उतना ही बीज रखना चाहिये जिसको मिट्टी से ढका जा सकता है ।
– अब गमला में जल डालकर छाया में रखना चाहिये ।
– एक सप्ताह तक एक एक कर ऐसे ही गमला में बीज को बोना चाहिये ।
– सात दिन के बाद पहली बार बोया गया गमला में गेहुँ का अंकुर होता है ।
– खाने योग्य जवारे काटकर फिर उक्त खाली गमला में पुनः बीज बोना चाहिये ।
– गमला में हर दिन जल देना पड़ता है । उसको सीधा सूर्य के किरण पड़ने वाले जगह में नही रखना चाहिये ।
– गेहुँ का जवारा उगाने लिये १८ से २० डिग्री तापमान उत्तम होता है ।

