चीन के ‘ऋण-जाल’ में, फंस गया नेपाल : अनिल तिवारी
अनिल तिवारी , वीरगंज | एक ऋण-जाल तब होता है जब कोई उधारकर्ता ऋण की मूल राशि पर भुगतान करने में असमर्थ होता है, इसके बजाए, वे केवल ऋण की ब्याज राशि पर भुगतान कर सकते हैं। बड़ा सवाल हमारे सामने यह है कि क्या हमारी नई अर्थव्यवस्था इतना विशाल ऋण पर भुगतान कर सकता है, जो हमे चीन द्वारा बेल्ट और रोड (बीआरआई) के माध्यम से सुनियोजित ढंग से निवेश होने वाला है।
प्रत्येक ऋणदाता ऋण उधार देने से पहले उधारकर्ता की क्रेडिट योग्यता का आकलन करता है। एक संप्रभु देश की क्रेडिट योग्यता का आकलन किया जाता है उसके sovereign credit rating (एससीआर) से। किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए विदेशी निवेशकों के साथ-साथ संभावित उधारदाताओं को आकर्षित करने के लिए यह एससीआर बहुत महत्वपूर्ण है। एससीआर का आंकलन देश के राजनीतिक माहौल, आर्थिक स्थिरता और इसके वित्तीय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए किया जाता है।
देश के उच्चतम एससीआर का मतलब देश में पूंजी प्रवाह अधिक है; यह एक अच्छी तरह से विकसित और स्थिर घरेलू पूंजी बाजार इंगित करता है जो बदले में घरेलू बचत को सुनिश्चित करता है। ये कारक सीधे देश की क्रेडिट योग्यता को दर्शाते हैं। इन सभी बातो को ध्यान में रखना बहुत जरुरी है, इससे पहले कि हम बीआरआई (BRI) के जैसे बड़े ऋण के बारे में सोचे।
हमारी उभरती अर्थव्यवस्था का जीडीपी 26 बिलियन अमरीकी डालर है जबकि इसकी वृद्धि/ जीडीपी काफी धिमी गति से करीब 4.8 फीसदी की रफ्तार से चल रही है। हमारी आर्थिक स्थिति भी काफी अच्छी नहीं हैं; हमारा सार्वजनिक राजस्व 6 बिलियन अमरीकी डालर है जबकि हमारे सार्वजनिक खर्च 7 बिलियन अमरीकी डालर से अधिक हैंं। ऐसे निराशाजनक स्थिति में कैसे नेपाल सरकार 3.04 अरब अमरीकी डालर के ऋण के प्रिंसिपल पर भुगतान करने का जोखिम उठा सकती है, जिसका निवेश सम्भवतः झापा में औद्योगिक पार्क बनाने में होगा?
यहां सावधानीपूर्वक ध्यान दिया जाना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान जैसे कि विश्व बैंक और एशिया विकास बैंक सॉफ्ट लोन (न्यूनतम या कम ब्याज दर पर ऋण) 0.25 से 3 प्रतिशत के ब्याज पर देते हैं ,जबकि वही चीन द्वारा प्रदान किए गए ऋण पर ब्याज 6.3 प्रतिशत से देना पड़ेगा। श्रीलंका जिसने चीन से 301 बिलियन अमरीकी डालर का कर्ज लिया है, वह चीन के कर्ज-जाल में पहले से ही फस चुका है, जबकि राजनीतिक रूप से अस्थिर पाकिस्तान भी चीन के इस कर्ज-जाल मे फसने वाला है । चीन ऋण को इक्विटी में बदलने के सिद्धांत पर कहीं पर निवेश करता है, जो कि आगे चल के उसे निवेश किए हुए स्थान पर नियंत्रण की शक्ति दे देता है ।
बीआरआई पर मलेशिया के नए निर्वाचित प्रधान मंत्री महातिर मोहम्मद ने हाल ही में अपना विचार दिया है जो कि उल्लेखनीय है। उनका कहना है कि “चीन बहुत सारा पैसा लेकर आता है और कहता है कि आप इस पैसे को हमसे उधार ले सकते हैं। परंतु,आपको सोचना चाहिए, ‘मैं यह पैसे/कर्ज को कैसे चुका सकता हूं? कुछ देश केवल परियोजना देखते हैं और कर्ज भुगतान वाले हिस्से को नहीं। इस तरह वे अपने देश के बड़े हिस्से खो देते हैं। हम यह नहीं चाहते हैं”। अतः प्रधान मंत्री महातिर मोहम्मद के अधीन वर्तमान सरकार फिर से जांच करने जा रही है,13.1 बिलियन अमरीकी डालर के पूर्व तट रेल लिंक परियोजना को, जिसको उनके पहले की सरकार ने चीन के साथ समझौता कर के बीआरआई के तहत लाने का निर्णय लिया था।
नेपाल को चीन के लालच में नहीं आना चाहिए, जिसका एकमात्र उद्देश्य भूमिे पर नियंत्रण और उसमे भी मुख्य रूप से भारत के पड़ोसी देशों की भूमि पर कब्जा करना है। मालदीव और Djibouti के ऊपर ऋण संकट के खतरे का बादल मंडरा रहा है जो की बीआरआई के तहत काफी परियोजना के रूप में चीन से पैसे उधार लिए गए थे। नेपाल ने राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता के वर्षों को देखा है और वर्तमान सत्तारूढ़ सरकार आर्थिक स्थिरता और समृद्धि का वादा किया है नेपाल की जनता के साथ। हालांकि, अधिकांश लोग अभी भी कमजोर आर्थिक और सामाजिक स्थिति के तहत अंदर है परन्तु सभी कर्ज के तरफ नहीं जाते । इस विषय में हमें मलेशिया जैसे छोटे विकसित देशों की तलाश करनी चाहिए, जो हमे काफी कुछ नया सीख दे सकता है।



हमारी स्थिति भी पाकिस्तान और श्रीलंका की तरह हो जायेगी।