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वन बेल्ट वनरोड अभिसाप कि आशिर्वाद ?

 
– सन्जीब बिक्रम शाह
इंडियन ओशियन के स्ट्रेटेजिक लोकेशन मे बसा हुआ एक खुबसुरत देश मालदीव. जहाँ हाल ही मे चुनाव प्रक्रिया समाप्त हुई है और चौकाने वाले नतीजे देखने को मिला 5 साल तक राज कर रहे अब्दुल्ला यामीन को भारी मतो से हराकर इब्राहिम मोहम्मद सोलिह सत्ता मे आए है यह सब जानते है की अबदुल्ला यामीन को चुनाव मे चीन द्वारा समर्थन प्राप्त था फिर भी वहाँ की जनता ने भारी मतो से अबदुल्ला यामीन को सत्ता से बाहर निकाल फेका ।
सत्ता मे आने से पहले ही मोहम्मद सोलिह और उनके मंत्रियो को पत्ता था कि उनहे चुनौतियो का सामना करना पडेगा । क्योकि पहले से ही पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने चीन के वन बेलट वन रोड(OBOR) प्रोजेक्ट मे शामिल होने का फैसला किया था और फ्रि ट्रेड एग्रीमेन्ट (FTA)को भी मंजुरी दे दी थी ।
इसके बाद ही चीन ने भारी पैमाने पर मालदीव को ऋण दिया था । इसीलिए सत्ता मे आते ही सोलिह द्वारा चीनी राजदुत से मुलाकात की और पत्ता चला उन्होने जो सोचा था उससे भी ज्यादा ऋण चीन ने मालदीव को दे चुका है लगभत $3 बिलियन डाँलर चीन ने मालदीव मे निवेश कर चुका है मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति ने एक द्वीप जोकि मालदीव के राजधानी से काफी करीब है उसको सिर्फ $4मिलियन डाँलर मे 50 साल के लिए चीन को लीज पर दे दिया गया । जो कि बाजार मुल्य से काफी कम है इसके साथ ही एक मील लंबा पुल, हजारो की संख्या मे अपार्टमेंट, एक नया रनवे एवं एक पैसेंजर टर्मिनल अन्तराष्ट्रिय हवाई अड्डा के पास बनाने का प्रोजेक्ट चीन को दिया गया था ।
इतना ज्यादा पैमाने में कंस्ट्रक्शन वो भी एक छोटे से देश में जहां 5 लाख लोगो की अबादी है यह सोचने वाली बात है । यह सारे सौदे गोपनीय नियम एवं शर्तो के साथ किये गए है। मालदीव हिंद महासागर मे बसा हुवा एक महत्वपूर्ण द्वीप है जोकि चीन के वन बैल्ट वन रोड परियोजना के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है क्योकि आने वाले समय मे हिंद महासागर व्यापार मार्ग के नजरिए से काफी अहम है इसी कारण चीन मालदीव जैसे द्वीव जो कि हिंद महासागर मे अवस्थित है इतनी बडी मात्रा मे निवेश कर रहा है । (OBOR)के तहत मालदीव, श्रीलंका, मलेशिया और भी छोटे छोट देशो ने चीन से कंस्ट्रक्सन के लिए ऋण लिया था ।
पहले तो चीन ने इस परियोजना को मित्र देशो के विकास के लिए जरुरी बताया और भारी मात्रा मे दुसरे देशो को कंस्ट्रक्सन के लिए ऋण दिया । पर साल वीतते ही इन देशो को पता चला कि इन सौदो मे काफी सारे छुपे हुए पहलु थे । जोकि प्रत्यक्ष नही थे इसके वजह से श्रीलंका को अपना एक पोर्ट चीन को 99 साल के लिए लीज पर देने पर मजबुर होना पडा क्योकि एक छोटे से अर्थव्यवस्था वाले देश के लिए इतना ज्यादा ऋण उठा पाना मुमकिन नही था इसी तरह मलेशिया भी कर्ज के जाल मे आधा डुब चुका है और नए प्रधानमन्त्री आते ही $22 मिलियन डाँलर के चीन के प्रोजेक्ट को रद्ध कर दिया । यह बताते हुए की इतना बडा प्रोजेक्ट उनके छोटे से देश के लिए न तो जरुरी है । न ही इसकी उपयोगिता है इससे उनका देश बुरी तरह कर्ज में डुब जाएगा ।
पाकिस्तान जो कि चीन का सबसे करिबी देश माना जाता है जहाँ हाल ही मे उनके नये प्रधानमन्त्री इमरान खान चीन गए थे और (ओबोर)प्रोजेक्ट पर बातचित की क्योकि पाकिस्तान भी दुसरे देशो की तरह कर्ज के जाल मे फँस चुका है और सउदी अरब से आर्थिक सहायता माँगी है । डिजेबोली से लेकर मोटिंनीग्रो भी (OBOR) के चपेट मे आ चुका है चीन ने अपने लुभावने showcse परियोजना दिखा के उन देशो को पहले भारी मात्रा मे ऋण दिया बाद मे जब वो देश ऋण चुका नही पाए । तो उनको देश के महत्वपूर्ण परियोजना मे अपना कब्जा जमा लिया ।
नेपाल मे भी निर्माण हेतु चीन भारी निवेश कर रहा है । इसी प्रकार पोखरा मे अंतराष्ट्रिय हवाई अड्डा का निर्माण चीन द्वारा बजार मुल्य से अधिक खर्च कर बनाया गया है जबकि यह कम खर्च मे भी बनाया जा सकता था । पिछले साल नेपाल सरकार ने $2.5बिलियन डाँलर के प्रोजेक्ट को रोक रखा था उस हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को नेपाल सरकार ने चीन को बनाने के लिए आवेदन की है । श्रीलंका, मलेशिया, मालदीव और भी कई देश जो चीन के ऋण जाल मे फँस गए इसे देखते हुए भी नेपाल सरकार उसी रास्ते पर चल रही है क्या सारे सौदे को ठीक से समझ कर नेपाल सरकार ये सौदे चीन से कर रही है । क्या इससे नेपाल की जनताको रोजगार मिलेगा ? क्या नेपाल के देशवाशियो को विकास की नई किरण देखने को मिलेगा या बाकिं देशो की तरह नेपाल भी चीन के ऋण जाल मे फँस जाएगी । नेपाल की जनता का भविष्य नेपाल सरकार के हाथो मे है ।

 

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