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प्रदेश नं. २ की राजधानी वीरगंज और नाम ‘मध्य मधेश’ रखने के लिए सुझाव

 

 

 

 

 

वीरगंज, ७ दिसम्बर । प्रदेश नं. २ वीरगंज निवासी बुद्धिजिवियों का कहना है कि प्रदेश राजधानी वीरगंज और प्रदेश का नाम ‘मध्यमधेश’ प्रदेश रखना ठीक है । प्रदेश राजधानी और नामकरण के संबंध में सुझाव संकलन हेतु आयोजित एक कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए बुद्धिजिवियों ने ऐसा सुझाव दिया है । प्रदेश की नाम और राजधानी संबंधी संवाद तथा सुझाव आयोग समिति ने कार्यक्रम आयोजन किया था । वक्ताओं को कहना है कि मधेश आन्दोलन की शुरुवात वीरगंज से ही हुआ है, इसीलिए प्रदेश राजधानी भी वीरगंज होना चाहिए । बुद्धिजिवियों को यह भी कहना है कि वीरगंज आर्थिक राजधानी भी है ।
सुझाव संकलन के वक्त वीरगंज के बुद्धिजिवियों चेतावनी दी है कि जनकपुर को अस्थायी राजधानी बनाकर संघीय सरकार ने गल्ती की है, अब प्रदेश सरकार को उसको करेक्सन कर वीरगंज को स्थायी राजधानी बनानी चाहिए । उन लोगों ने यह भी कहा है कि अगर वीरगंज को स्थायी राजधानी नहीं बनाया जाएगा तो राजधानी के लिए वीरगंज आन्दोलन करने के लिए बाध्य होगी । । इसतरह चेतावनी देनेवालों में पर्सा से निर्वाचित संघीय सांसद् तथा प्रदेश सांसद् भी हैं ।
संवाद तथा सुझाव आयोग समिति के संयोजक डा. हरिवंश झा की सभापतित्व में सम्पन्न कार्यक्रम में प्रदेश नं. २ के आर्थिक मामिला राज्य मन्त्री उषा यादव, संघीय सांसद् प्रदीप यादव, हरिनारायण रौनियार, प्रदेश सभा के सांसद् करिमा वेगम, भिमा यादव, सिंहासन साह कलवार, उन्नत अंंंंसारी, महिला नेतृ रम्भा मिश्रा, आयोग के सदस्य रामप्रवेश बैठा, लाल चौधरी आदि विशिष्ठ व्यक्तियों की उपस्थिति रही थी । स्मरणीय है, प्रदेश नं. २ स्थित ८ जिलों में प्रदेश का नाम और स्थायी राजधानी के संबंध में सुझाव संकलन कर प्रदेश सरकार को देना आयोग की जिम्मेदारी है । उसी जिम्मेदारी के अनुसार आयोग ने सुझाव संकलन किया है । आयोग को कूल ४५ दिनों की समयावधि दी गई थी । ४० दिन बितने के बाद कल बिहीबार से आयोग ने अपने काम शुरु किया है ।

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