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रथ सप्तमी सूर्य भगवान के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है

 
12 feb
रथ सप्तमी माघ महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। आमतौर पर रथ सप्तमी का पर्व वसंत पंचमी के दूसरे या तीसरे दिन
मनाया जाता है।
इस पर्व को सूर्य जयंती, माघ जयंती या माघ सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के अवतार सूर्य देव की आराधना की जाती है।
क्यों मनाते हैं : रथ सप्तमी सूर्य भगवान के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है। इसी दिन भगवान सूर्य ने पुरे विश्व को अपनी ऊर्जा से रोशन किया था। रथ सप्तमी के दिन भगवान सूर्य की आराधना करना बहुत शुभ माना जाता है।
रथ सप्तमी माघ महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। आमतौर पर रथ सप्तमी का पर्व वसंत पंचमी के दूसरे या तीसरे दिन
मनाया जाता है।
इस पर्व को सूर्य जयंती, माघ जयंती या माघ सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के अवतार सूर्य देव की आराधना की जाती है।
क्यों मनाते हैं : रथ सप्तमी सूर्य भगवान के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है। इसी दिन भगवान सूर्य ने पुरे विश्व को अपनी ऊर्जा से रोशन किया था। रथ सप्तमी के दिन भगवान सूर्य की आराधना करना बहुत शुभ माना जाता है।
रथ सप्तमी का महत्व
सूर्य देव को समर्पित इस पर्व के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व पवित्र जल में स्नान करना बहुत शुभ माना जाता है। अरुणोदय में रथ सप्तमी स्नान करना इस दिन की महत्वपूर्ण परम्पराओं में से एक है। अरुणोदय, सूर्योदय से कुछ समय पूर्व होता है, जिसमें स्नान करने से व्यक्ति स्वस्थ रहता है और सभी बीमारियों से बचा रहता है।
सूर्योदय के समय स्नान के बाद भगवान सूर्य को अर्घ्यदान करने से यश, सौभाग्य, ऐश्वर्य, समृ‍द्धि और वैभव का मार्ग खुलता है।
अर्घ्यदान विधि : खड़े होकर नमस्कार मुद्रा में एक कलश से भगवान सूर्य को धीरे-धीरे जल अर्पित किया जाता है। उसके बाद घी के दीपक और कपूर, धूप और लाल फूलों से सूर्य देव की पूजा की जाती है। पूजा के पश्चात् दान-पुण्य करके सूर्यदेव से लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और अच्छे जीवन का आशीर्वाद मांगा जाता है। इस दिन गायत्री मंत्र का जप करना भी बहुत शुभ माना जाता है। रथ सप्तमी को अचला सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है।
रथ सप्तमी का महत्व
सूर्य देव को समर्पित इस पर्व के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व पवित्र जल में स्नान करना बहुत शुभ माना जाता है। अरुणोदय में रथ सप्तमी स्नान करना इस दिन की महत्वपूर्ण परम्पराओं में से एक है। अरुणोदय, सूर्योदय से कुछ समय पूर्व होता है, जिसमें स्नान करने से व्यक्ति स्वस्थ रहता है और सभी बीमारियों से बचा रहता है।
सूर्योदय के समय स्नान के बाद भगवान सूर्य को अर्घ्यदान करने से यश, सौभाग्य, ऐश्वर्य, समृ‍द्धि और वैभव का मार्ग खुलता है।
अर्घ्यदान विधि : खड़े होकर नमस्कार मुद्रा में एक कलश से भगवान सूर्य को धीरे-धीरे जल अर्पित किया जाता है। उसके बाद घी के दीपक और कपूर, धूप और लाल फूलों से सूर्य देव की पूजा की जाती है। पूजा के पश्चात् दान-पुण्य करके सूर्यदेव से लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और अच्छे जीवन का आशीर्वाद मांगा जाता है। इस दिन गायत्री मंत्र का जप करना भी बहुत शुभ माना जाता है। रथ सप्तमी को अचला सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है।

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