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कैंसर हाेने के कई कारण हाे सकते हैं सिर्फ सिगरेट नही है वजह

कैंसर एक व्यापक शब्द है। यह उस बीमारी का वर्णन करता है जो तब होता है जब सेलुलर परिवर्तन कोशिकाओं के अनियंत्रित विकास और विभाजन का कारण बनता है। कुछ प्रकार के कैंसर तेजी से कोशिका वृद्धि का कारण बनते हैं, जबकि कुछ धीरे-धीरे परिवर्तित होते हैं। कैंसर एक ट्यूमर के तौर पर भी विकसित होता है। भारत में कैंसर के मरीज दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। मुंह, गला, फेफड़े, आंतों के अलावा शरीर में कई तरह के कैंसर हो सकते हैं। अगर कैंसर के कारणों की बात करें तो इसके पीछे ज्‍तादातर आपका खानापान और जीवनशैली जिम्‍मेदार है। यहां हम आपको कुछ ऐसे आहार के बारे में बता रहे हैं जो कैंसर के कारक होते हैं। अगर आप इनका सेवन अधिक मात्रा में करते हैं तो इनसे सतर्क रहने की जरूरत है।

एल्कोहल भी है घातक

एल्कोहल के अधिक सेवन से डायबिटीज, मोटापा और कैंसर जैसी घातक बीमारियों का खतरा बना रहता है। जो लोग शराब पीते हैं और दो वंशानुगत कैंसर जीन उनमें हैं तो शराब से पैदा होने वाले एक उपात्पाद के कारण उनमें कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। आजकल महिलाएं भी इसका आनंद लेने में पीछे नहीं रह गयी है। लेकिन एक ताजा स्टडी के अनुसार एल्कोहल पीने वाली महिलाओं में स्तन कैंसर की दर में 30 प्रतिशत की वृद्दि हुई है।

रेड मीट

हालांकि वाइट मीट की तुलना में रेड मीट को देखते ही हम ललचाने लगते हैं। और कम मात्रा में सेवन से यह कुछ तरह के कैंसर के खिलाफ लड़ने में मदद करता है। लेकिन विभिन्‍न अध्‍ययनों के अनुसार, रेड मीट के सेवन से कैंसर से होने वाली मृत्‍यु का खतरा लगभग 10 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। रेड मीट में वैसे तो लिनोलिक एसिड का गुण होता है। लेकिन इसे हर रोज खाना बहुत खतरनाक होता है और इसके लगातार सेवन से कैंसर का जोखिम बढ जाता है। यह स्तन, बड़ी आंत एवं प्रॉस्टेट कैंसर के खतरे को बढ़ाने में भी सहायता करता है। यह सलाह दी जाती है कि सप्ताह में 300 ग्राम से अधिक रेड मीट का सेवन नहीं करना चाहिए।

आर्टिफिशियल शुगर

चीनी के ज्‍यादा सेवन करना नुकसानदेह होता है, और इसके ज्‍यादा सेवन से डायबिटीज का खतरा भी बढ़ जाता है, और वजन में भी लगातार बढ़ोतरी होने लगती है। यह बात तो हम सभी जानते है। लेकिन क्‍या आज जानते हैं कि चीनी की जगह इस्‍तेमाल किये जाने वाले आर्टिफिशियल स्वीटनर एक तरह का केमिकल है। आर्टिफिशियल स्वीटनर का स्वाद चीनी की तरह ही होता है, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि यह किसी मीठे जहर से कम नहीं है। ओहियो यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिसिन के प्रोफेसर और चेयरमैन डॉक्टर राल्फ वॉटसन के अनुसार, आर्टिफिशियल स्वीटनर से सिरदर्द, याददाश्त की कमी, अचानक चक्कर आकर गिर पड़ना और कैंसर जैसी बीमारियों के शिकार हो सकते हैं। इसके सेवन से मस्तिष्क ट्यूमर की संभावना बनी रहती है।

प्रोसेस्‍ड सफेद आटा

सफेद आटा आपकी सेहत के लिए अच्‍छा नहीं होता, क्‍योंकि वह प्रोसेस्‍ड होने के कारण सफेद होता है और इसमें सैचुरेटेड फैट की बहुत अधिक मात्रा में होती है। सैचुरेटेड फैट का संबंध कैंसर से होता है। इसमें अधिक केमिकल और क्लोरीन गैस होती है। इसका शरीर पर बुरा असर पड़ता है। सफेद चावल भी अम्लीय खाद्य पदार्थ की सूची में आते है, क्योंकि इसमें ब्राउन चावल की तुलना में शुगर की मात्रा बहुत अधिक होती है। अगर किसी को कैंसर के शुरुआती लक्षण दिखें तो इसे खाने से बचना चाहिए।

माइक्रोवेव पॉपकॉर्न से बचें

हर कोई पॉपकार्न खाने के लिए उतावला रहता है। चाहे मूवी हॉल हो या घर में दोस्‍तों के साथ मैच देखने का प्रोग्राम, इस समय पॉपकॉर्न को सभी खाना पसंद करते हैं। यह एक टाइम पास, सस्ता और स्वादिष्ट आहार है। और इसे माइक्रोवेव में बनाना बहुत आसान और सुविधाजनक होता है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि इसको बनाते समय इसमें एक (PFOA) केमिकल डाला जाता है जो बहुत खतरनाक होता है। इसके खाने से लोगों का किडनी, मूत्राशय, लीवर और आंत कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। एक अध्‍ययन के अनुसार माइक्रोवेव में बने पॉपकार्न का प्रयोग करने से फेफड़ों के कैंसर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

 

डोनट्स

खाने और देखने में कमाल डोनट्स की लालसा आपको अपनी ओर खींच ही लेती हैं। लेकिन डोनट्स कैंसर के खतरे को एक से अधिक प्रकार से बढ़ा सकता है। डोनट्स सफेद आटे, चीनी और हाइड्रोजेनेटेड ऑयल से बनता है और इसमें उपस्थित चीनी की मात्रा शरीर में इंसुलिन की मात्रा को प्रभावित करती है और कैंसर इन कोशिकाओं की वृद्धि तथा विभाजन को प्रोत्साहित करती है, खासकर अग्नाशय के कैंसर में। इसलिए कैंसर से बचने के लिए इस आहार की लालसा को छोड़ना ही बेहतर है।

हॉट डाग्स और सॉस

हॉट डाग्स और सॉस में बहुत अधिक मात्रा में नमक और केमिकल होता है। इसमें सोडियम नाइट्रेट स्मोक्टड होता है। जिससे कैंसर की उत्पत्ति होती है। अध्‍ययन के अनुसार, इसका नियमित सेवन करने वाले लोगों में सामान्य लोगों के मुकाबले 43 प्रतिशत लोगों की मौत में वृद्धि हुई है।

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