स्लो मोशन में नेट, हाय रे मेरा देश
व्यग्ंय………बिम्मी शर्मा

यह देश कितना स्लो मोशन में है यह यहां चलने वाला ईटंरनेट का स्पीड देख कर पता चल जाता है । जैसा देश है वैसा ही ईटंरनेट का स्पीड है और जैसा ईटंरनेट का स्पीड है वैसी ही इस देश के विकास की गति है । इस देश को लूज मोशन हो गया है इसी लिए देश स्लो मोशन में कछूए के चाल में रेंग रहा है । विश्व के बाकी सारे देश दौड रहे हैं, कूद रहे हैं पर यह देश अपाहिज सा बस रेंग ही रहा है । देश को दौडने और कूदने वाला बनाने के लिए इस के पैर में बच्चे की तरह मालिश करना जरुरी है । पर कौन यह बला मोल ले ? इसी लिए अनेरवा बिरवा के राम रखवार के मूहावरे की तर्ज पर बस श्री पशूपतिनाथ की कृपा पर ही यह देश गिरते, गिरते भी अडा हुआ है ।
इस देश को तेज मोशन में दौडाने के लिए देश को चलाने वाले किसी के भीतर भी कोई ईच्छा शक्ति नहीं हैं । यह ईच्छा शक्ति ही बलवती हो कर कूछ करने और करवाने के लिए उफान मारती है । पर सरकारी संयत्र खुद तो बलहीन है ही देश को भी वैसा ही औचित्यहीन बनाने पर तुली है । यहां किसी को दौड्ने या कूद्ने की चाह नहीं है क्यों कि सभी मानसिक रुप से अपाहिज हैं । खुद का, परिवार का या नाते रिश्तेदारों का विकास हो जाए बस इन के लिए यही बहुत है । देश और समाज जाए भांड में ईन्हे कोई मतलब नहीं हैं । बस उनका का काम होते रहना चाहिए और खा कर डकार मारने का काम यह बखूबी करते हैं । क्यों कि इन्हे चुपके से खाने और सब को दिखा कर डकार मारने के अलावा कूछ आता भी नहीं हैं । देश को भी यह बरसों ‘से घुन की तरह खा रहे हैं ।
जैसा देश वैसा ही भेष कर के यहां पर ईटंरनेट की सेवा देने वाले प्रदायक संस्था भी अपने रहनुमा सरकार चलाने वालों की ही राह पर चलते हुए ईंटरनेट की सुविधा दे रहे हैं । सुविधा देने के नाम पर सरेआम अपने ग्राहकों को लूट रहे हैं । चाहे वह सरकारी ईटंरनेट प्रदायक संस्था हो या निजी सभी अपनी जेब भरने और ग्राहकों को ठगने में लगे हुए हैं । क्यों कि जब सत्ता में काविज लोग ही देश को खरगोश नहीं कछूवा बनाने पर लगे हुए हैं तब ईटंरनेट बेचारा अकेला भांड थोडे ही झोंक सकता है । देश तो पंचायत काल से ही स्लो मोशन में हैं । चाहे देश में कोई भी तंत्र आ जाए यहां बस भांडतंत्र ही अपना करिश्मा दिखाता है । और सभी तंत्र और मंत्र इस देश के लिए मारक नहीं हैं ।
लूट, खसोट की राजनीति और इसी स्कूलिंग से दीक्षित हुए लोग ही सत्ता के गलियारे में ताकझांक करते है, चहलकदमी करते है । तब देश इन्ही के ठेंगें पर ही न चलेगा न ? यह तो बस पान खा कर उस की पीक सत्ता के दिवार में पिचक कर अपनी जिम्मेवारी पूरी कर लेते हैं । उस को पोछने का काम तो देश की अवाम का है । जब देश को विकास के मार्ग पर दौडाने का जिम्मा लिए हुए सत्ता के ड्राइवर ही देश को स्लो मोशन में उबड खाबड सडक पर चला रहे है । तब देश का एकदिन दुर्घटनाग्रस्त होना अवश्यम्भावी है । तब न देश रहेगा न देश को वंशी की तरह बजाने वाले नेता रहेंगें ।
देश का तंत्र तो परिवर्तित होता है पर इस को चलाने वाले नेताओं का मंत्र या मानसिक स्थिति वही रहती है । जो भी सत्ता में जाता है वह देश को और नीचे गर्त में ले जाता है । राणातंत्र, राजतंत्र, प्रजातंत्र और अब लोकतंत्र । जो देश और जनता के लिए दिनानुदिन शोकतंत्र बनता जा रहा है । क्यों सत्ता चलाने वाले नेताओं के पेट पर भूखतंत्र काविज है । और भूख और अभाव से ग्रस्त ईंसान कोई भी अपराध या नाजायज कर्म करने से नहीं हिचकता है । अभी वही हो रहा है कल बहुदल या लोकतंत्र लाने के लिए सडक में फटेहाल खाली पैर जो दौडा था आज वही रेड कार्पेट पर महंगे जूत्ते पहन कर सत्ता का तर माल खा और उडा रहा है । वह खुद तो खूब तेज मोशन में है पर देश और उस के विकास और प्राप्ति नाम के बच्चे कुपोषण से ग्रसित हो कर स्लो मोशन में बडे आन, बान और शान के लोकतंत्र का परचम अपने हाथ में ले कर लूटतंत्र के सडक पर चल रहे हैं ।
यह देश ऐसा ही है और ऐसा ही रहेगा । क्यों किं हमे स्लो मोशन का पिक्चर देखना पसंद है । स्लो मोशन या गति में ईटंरनेट चलाना अच्छा लगता है । ईसी लिए देश भी स्लो मोशन मे चल रहा है । यहां देर किसे हो रही है भाई ? सुबह दश बजे पान चबाते हूए आफिस जाना और शाम को पांच बजे कान खुजाते हुए घर आ कर नाश्ता करना यही ईस देश के ब्युरोक्रयाट का स्वभाव है । देश भी ईन्ही कि तर्ज पर पैर खुजाते हूए स्लो मोशन में आगे बढ रहा है ।

