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पर्सा फोरम से पार्टी परित्याग की आंधी 

 
रेयाज आलम , बीरगंज, फाल्गुन २५ गते शनिवार । संघीय समाजवादी फोरम,पर्सा को बड़ा झटका लगा। फोरम से निर्वाचित और प्रभावशाली नेता फोरम छोड़कर दूसरे पार्टी में प्रवेश कर रहे है। जिल्ला के जिम्मेवार नेता के क्रियाकलाप से नाराज नेता लोग पार्टी छोड़कर जा रहे है। संघीय मामला तथा सामान्य प्रशासन मंत्री लालबाबू पडित के प्रमुख आतिथ्य में सम्पन्न पार्टी प्रवेश कार्यक्रम में छिपहर माई गावपालिका के निर्वाचित वडा अध्यक्ष राजबली यादव, असर्फी यादव, अमरेश यादव, लक्ष्मण खलीफा, अमर ख़लीफ़ा, जयमंगल खलीफा, भलुवइयाँ के कैलाश यादव, हरिंदर साह क़ानू, भिष्वा से फ़रीन्द्र साह कानू, चरगाहा से शिक्षक फोरम के रामानंद साह कानू, चन्द्रिका साह कानू, गोपाल साह कानू के साथ-साथ सैकड़ो नेता-कार्यकर्त्ता ने फोरम पार्टी परित्याग करके नेकपा में प्रवेश किया।

निर्वाचन के बाद फोरम पार्टी के क्रियाकल्प से नाराज लोगो का पार्टी परित्याग का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। इसके पहले भी सैकड़ो कार्यकर्त्ता पार्टी परित्याग कर चुके है। छिपहर माई गावपालिका के प्रभावशाली नेता मणिकांत गुप्ता पार्टी से नाराज होकर पार्टी परित्याग करके कांग्रेस में प्रवेश करने का घोषणा कर चुके है। छिपहर माई गावपालिका के निर्वाचित वडा अध्यक्ष राजबली यादव ने “हिमालिनी” को बताया की “फोरम पार्टी की उपेक्षा और प्रदेश सांसद सिंघासन साह के भाई  इन्द्रासन साह जो गावपालिका प्रमुख के उम्मीदवार भी रहे है, उनके गलत क्रियाकल्प, परिवारवादी-जातवादी सोच और हरेक जगह झगड़ा लगाने के प्रवृति से तंग आकर पार्टी परित्याग करना पड़ा”। गौरतलब है की पर्सा में मिर्जापुर-नौगावा यादव बहुल क्षेत्र है और फोरम का गढ़ माना जाता था।

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फोरम में स्थानीय निर्वाचन के बाद से ही असंतुष्टि के स्वर उठने लगे थे,लेकिन जिला अध्यक्ष प्रदीप यादव ने इन बिषयों पर ध्यान नहीं देकर खुद मंत्री बनने के प्रयास में समय गवायाँ। मंत्री बनने के क्रम में प्रदीप यादव और हरिनारायण रौनियार में प्रतिस्पर्धा होने लगी, सूत्रों के अनुसार प्रदीप यादव ने हरिनारायण रौनियार को कमजोर करने के लिए पप्पू कंस्ट्रक्शन का कच्चा-चिट्ठा नेकपा के राजकुमार गुप्ता और मीडिया में उछाल कर हरिनारायण रौनियार का निलंबन करवाया। इसके बाद भी मंत्री नहीं बनने पर राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र यादव को गाली-गलौज तक करवाया और मंत्री नहीं बनाने से नाराज होकर पार्टी तहस-नहस करने पर तुले हुए है। निर्वाचित असन्तुष्टो का बैठक करने का निर्देश राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जिला अध्यक्ष को दो महीने पहले ही दिया था,लेकिन प्रदीप यादव ने बैठक ही नहीं किया।
जिला इंचार्ज सिंघासन साह मूकदर्शक बने रहे, उनके सामने कई नेताओ के साथ दुरव्यवहार होता रहा लेकिन सबके चहेते बनने के क्रम में धृतराष्ट्र बने रहे, जिसके कारण जिला के नेता कई खेमो में बट गए। गुटबाजी का आलम ये है की सांसद, मेयर और बिधायक पति को गली करता है, वे इस्तीफा की पेशकश करते है। मेयर और वडा अध्यक्ष में तालमेल नहीं है। प्रमुख और वडा अध्यक्ष में तालमेल नहीं है। निर्वाचित सदस्य और पार्टी के बिच कोई संपर्क नहीं है। नेताओं का फोन नहीं उठता था। ऐसे में जिस प्रकार पार्टी प्रवेश की बाद आई थी उसी प्रकार पार्टी परित्याग की आंधी आ रही है। सूत्रों के अनुसार आज  सिमरोंगढ़ में फोरम के निर्वाचित गावपालिका प्रमुख नेकपा में प्रवेश करने वाले है। कई निर्वाचित प्रमुख पार्टी परित्याग के क्रम  में है।

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