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संघियता संबन्धी निर्णय अब दिल्ली और बेजिगं के हाथ मे

 

संघियता संबन्धी निर्णय अब दिल्ली और बेजिगं के हाथ मे

६सितम्बर, काठमाण्डू, कल्ह हुइ नेपली कांग्रेस केन्द्रीय समिति की वैठक मे इसवार राष्ट्रीयता सम्बन्धी मुद्दा को जोड सोर से उठाया गया है । महासचिव सिटौला व्दारा पेश किया गया प्रतिवेदन को गौण रखकर कांग्रेसी नेताओं ने राषट्रीयता के मुद्दा पर गम्भिर प्रश्न उठाते हुए भरत और चीन से नेतृत्व को बात करने के लिए आग्रह किया । नेताओं मे भारत के प्रति आक्रोश ज्यादा दिख रहा था । अपनी मागं को सन्तुलन बनाए रखने केलिए इनलोगो ने चीन का भी नाम साथ मे रख दिया । वैठक मे उपसभापति रामचन्द्र पौडेल ने कहा कि भारत ने माओवादी को और चीन ने ए-माले को अपनी मुट्ठी मे पकड के रखने से देश की राजनीतिक स्थिति बद्द्तर बन गयी है ।उन्होने महामन्त्री सिटौला के प्रतिवेदन मे रष्ट्रीयता की जीक्र नही होने की कडी आलोचना की ।वैठक मे केन्द्रीय सदस्य तथा पुर्व गृहमन्त्री पूर्ण्बहादुर खडका ने राष्ट्रीयता समबन्धी मुद्दा पर जल्द लक्षमणरेखा खिचने की मागं की ।उन्होने कहा कि विदेश के सहारा वेगैर प्रधानमन्त्री बनना और पद पर टिके रहना मुश्किल सा बनगया है जैसा कि लोगों की धरना बन गयी है ।प्रधानमन्त्री बनते ही कुर्सी हिलने लगती है और पद से हटते ही विदेशी को गाली देने की मानसिकता लोगों मे आगयी है ।देश इसतरहकी  ढोगीं राष्ट्र्वाद झेलरही है । खडका ने कहा कि भारत और चीन को उसकी सुरक्षा के बारे मे अगर अश्व्सत नही किय गया तो देश मे अफगानिस्तान कि हलात हो सकती है। उनका कहना था कि भारत और चीन जबतक अपनी सुरक्षा के बारे मे पुर्णतः अश्वस्त नही हो जाती तबतक वह इस देश का सबिंधान बनने मे सहयोग नही करेगी । वार्ता के लिये उन्होने काग्रेंस नेतृत्व से आग्रह किया । काग्रेंस केन्द्रीय सदस्य चन्द्र भण्डरी ने संघियता संबन्धी निर्णय अब नेपाल के हाथ मे नही रहकर दिल्ली और बेजिगं के हाथ मे चले जाने की बात बतायी । उन्होने कहा कि कांग्रेस को राष्ट्रीयता सम्बन्धी विवाद पर चुप लगाकर नही वैठना चहिये ।

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स्मरणीय है कि अबतक सबसे ज्यादा दिन तक शासन का बागडोर नेपाली कांग्रेस के हाथ मे रह चुकी है । सत्ता मे रहते हुये इन्होने कभी भी राष्ट्रीयता का मुद्दा नही उठया था । आज राष्ट्रीयता की मुद्दा सत्ता मे आने कीछ्टपटाहट के सिवा और कुछ नही दिखती है।

 

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