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संसदीय समिति ने सुझाव दिया कि छावपडी बैठने वालों पर भी कार्रबाई किया जाना चाहिए

 

२८ मार्च, काठमांडू । संसद की महिला तथा सामाजिक समिति ने छाउपडी मे बैठने वाली के ऊपर भी कार्रबाई करने की सूझाव सरकार को दी है । समिति के सात सदस्यीय अध्ययन भ्रमण टोली ने बाजुरा के स्थलगत अध्ययन तथा अन्तरक्रिया कर तैयार प्रतिवेदन में रजश्वला के समय छाउ घर में बैठने वाली किशोरी तथा महिला के ऊपर कार्रबाई करने का सूझाव दिया है ।
महिला समिति के प्रतिवेदन में छाउपडी कुप्रथा अन्त्य के पहल के लिए अल्पकालीन तथा दीर्घकालीन उपाय दर्शाया गया है । अल्पकालीन उपाय अन्तर्गत के सुझाव में लिखा गया है– ‘तत्काल फौजदारी अपराध संहिता ऐन, २०७४ के दफा १६८ में छाउपडी पर स्वयम् बैठने के र्लि भी कारबाही की व्यवस्था होना चाहिए, इस तरह ऐन संशोधन करना चाहिये ।’
फौजदारी अपराध संहिता ऐन २०७४ के दफा १६८ का उपदफा (३) में उल्लेखित वाक्यांश इस प्रकार है, ‘महिला को रजश्वला वा सुत्केरी के अवस्था में छाउपडी में रखना या किसी भी प्रकार का भेदभाव, छुवाछुत वा अमानवीय व्यवहार करना या कराना नहीं चाहिये ।’ इसी दफा के उपदफा (४) में इस प्रकार का भेदभाव करने वाला को तीन महिना कैद और तीन हजार जरिवाना वा दोनो सजायँ हाने की व्यवस्था है । राष्ट्रयसेवक के हक में दफा अनुसार कसुर करने पर तीन महीना और ज्यादा होने का प्रावधान है ।

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